पूर्व RBI गवर्नर जताया भरोसा, अगले कुछ वर्षों में वैश्विक GDP ग्रोथ में 20% योगदान देगा भारत

2.4kViews
1523 Shares

पूर्व रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) गवर्नर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास ने शनिवार को कहा कि भारत अगले कुछ वर्षों में वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में करीब 20% का योगदान देगा। उन्होंने यह उपलब्धि मजबूत घरेलू मांग और सही आर्थिक व वित्तीय नीतियों का परिणाम बताया, जिन्होंने भारत को वैश्विक झटकों से निपटने में सक्षम बनाया है। पुणे के गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स में 85वें काले मेमोरियल लेक्चर में “बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था” विषय पर बोलते हुए, दास ने भारत के आर्थिक लचीलेपन और गतिशीलता पर जोर दिया।

वैश्विक अनिश्चितता में भारत का लचीलापन
शक्तिकांत दास ने कहा कि कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों ने आत्मनिर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनिश्चितताओं और पुराने नियम-आधारित वैश्वीकरण व्यापार तंत्र में बदलाव का सामना करना पड़ रहा है। इस बदलते परिदृश्य में भारत ने “आत्मनिर्भर भारत” के विजन और पिछले एक दशक के संरचनात्मक सुधारों के दम पर कई वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है।

मुक्त व्यापार समझौतों पर भारत का फोकस
दास ने भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर निष्पक्ष और संतुलित परिणामों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत के पास वर्तमान में 14 मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और 6 प्राथमिक व्यापार समझौते (पीटीए) हैं। इनमें हाल ही में यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) के देशों (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन) के साथ हुए समझौते शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, पेरू, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत चल रही है।

रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय व्यापार समझौते
दास ने कहा कि वैश्विक स्तर पर रणनीतिक स्वायत्तता (स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी) अब प्राथमिकता बन गई है। क्षेत्रीय व्यापार समझौते अब अधिक व्यावहारिक और छोटे-छोटे व्यापारिक गठबंधनों की ओर बढ़ रहे हैं। भारत ने इन बदलावों के बीच अपनी आर्थिक नीतियों और सुधारों के जरिए मजबूत आधार तैयार किया है, जिसने इसे वैश्विक आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देने की स्थिति में ला खड़ा किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *