बिहार का डिजिटल हेल्थ में नया रिकॉर्ड, पटना सबसे आगे; 1.13 करोड़ से ज्यादा मरीजों का डेटा ऑनलाइन
बिहार में मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) लिंकिंग में पटना ने पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। पटना में अब तक 1 करोड़ 13 लाख 31 हजार 390 स्वास्थ्य रिकॉर्ड जोड़े जा चुके हैं।
पटना के बाद मुजफ्फरपुर और सारण ने बनाई जगह
जिलावार आंकड़ों के अनुसार डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड जोड़ने में पटना अन्य जिलों से काफी आगे है। मुजफ्फरपुर में 39 लाख 83 हजार 403 और सारण में 35 लाख 5 हजार 408 रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। रोहतास में 34 लाख 69 हजार और भागलपुर में 34 लाख 8 हजार से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड जोड़े जा चुके हैं।
10 जिलों में 31 लाख से ज्यादा डिजिटल रिकॉर्ड
पूर्वी चंपारण, मधुबनी, गया, समस्तीपुर और वैशाली में भी डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड जोड़ने की रफ्तार अच्छी है। इन जिलों में 31 लाख से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। दरभंगा, बेगूसराय और गोपालगंज में भी अभियान के तहत उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
सिवान, सीतामढ़ी और नालंदा में भी तेज हुआ काम
सिवान, सीतामढ़ी और नालंदा में 25 लाख से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल सिस्टम से जोड़े गए हैं। राज्य के बाकी जिलों में भी इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड को लिंक करने का काम जारी है। इसका उद्देश्य मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल और व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराना है।
पुरानी रिपोर्ट लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत
डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार होने के बाद मरीजों को हर बार पुरानी जांच रिपोर्ट और उपचार का विवरण साथ लेकर चलने की जरूरत कम हो सकती है।
अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज के दौरान अधिकृत चिकित्सक मरीज की पिछली स्वास्थ्य जानकारी देख सकेंगे। इससे इलाज का इतिहास समझने में सुविधा होगी।
एक क्लिक पर मिल सकेगा इलाज का पुराना रिकॉर्ड
मरीज की सहमति और अधिकृत पहुंच के आधार पर चिकित्सक पुराने उपचार, जांच रिपोर्ट और अन्य जरूरी चिकित्सकीय जानकारी देख सकते हैं।
इससे मरीज के इलाज की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। खासकर उन मरीजों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, जो अलग-अलग अस्पतालों या शहरों में इलाज कराते हैं।
अनावश्यक जांच से बचने में भी मिल सकती है मदद
यदि मरीज की पिछली जांच और उपचार संबंधी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध है तो चिकित्सक जरूरत के अनुसार उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
इससे पहले हो चुकी जांच को दोहराने की जरूरत कम हो सकती है। इससे मरीज का समय और संभावित खर्च दोनों बचाने में मदद मिल सकती है।
मरीज की सहमति से ही रिकॉर्ड तक पहुंच
डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड व्यवस्था में मरीज की सहमति और अधिकृत पहुंच महत्वपूर्ण है। चिकित्सक जरूरत के अनुसार मरीज के उपलब्ध स्वास्थ्य रिकॉर्ड को देख सकते हैं। इससे इलाज के दौरान सही जानकारी तक पहुंच आसान होने के साथ स्वास्थ्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है।
बिहार के सभी 38 जिलों में चल रहा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अभियान
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड जोड़ने का काम चल रहा है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि पटना इस अभियान में फिलहाल सबसे आगे है। आने वाले समय में अन्य जिलों में भी रिकॉर्ड लिंकिंग बढ़ने से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

