एक दो नहीं…. बिहार की बेटी ने लगा दी सरकारी नौकरियों की झड़ियां, 3 विभागों में लहराया सफलता का परचम

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 सफलता का मतलब सिर्फ सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य और प्राथमिकताओं के अनुरूप सही फैसला लेना भी है।

जमालपुर की रागिनी कुमारी ने अपने संघर्ष और फैसलों से यह साबित किया है। आर्थिक चुनौतियों के बीच तीन साल तक बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का खर्च उठाया।

मेहनत ऐसी रंग लाई कि एक के बाद एक तीन सरकारी नौकरियों में सफलता हासिल की। हालांकि, दो नौकरियां छोड़कर उन्होंने अपनी पसंद की राह चुनी। शिवपुरी कालोनी निवासी पंकज कुमार की पुत्री रागिनी ने एनसी घोष बालिका उच्च विद्यालय से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद जगजीवन राम श्रमिक महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने किसी पर निर्भर रहने के बजाय ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। तीन वर्षों तक बच्चों को पढ़ाकर अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का खर्च जुटाया।

वर्ष 2025 में रागिनी ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की परीक्षा उत्तीर्ण की। पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी। इसी वर्ष बिहार पुलिस की परीक्षा में भी सफल हुईं और सात महीने तक प्रशिक्षण लिया। बाद में इस नौकरी को भी छोड़ दिया।

इसके बाद विद्युत विभाग की लिपिक स्तरीय परीक्षा में सफलता हासिल की। इसे अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप बेहतर विकल्प मानते हुए उन्होंने इसे चुना।

वर्तमान में वह बेगूसराय के साहेबपुर कमाल में कार्यरत हैं। रागिनी की कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता का रास्ता संघर्ष से होकर गुजरता है और सही निर्णय भी सफलता का अहम हिस्सा है।

बेटी को शिक्षित करें, दें सम्मान : मधु

सामाजिक नेतृत्वकर्ता मधु देवी कहती हैं कि बेटियां परिवार की खुशियां ही नहीं, समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी हैं। बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

बेटा-बेटी के बीच भेदभाव समाप्त कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना हर परिवार की जिम्मेदारी है। बेटी खुशहाल होगी, तभी परिवार और समाज समृद्ध होगा।

भेदभाव नहीं, दोनों को मिले अवसर : उषा

एक माह और गृहिणी उषा देवी कहती हैं कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं। दोनों को समान अधिकार, सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

वह बेटी और बहू के बीच भी किसी तरह का भेदभाव उचित नहीं मानतीं। माता-पिता को बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों को पूरा करने में सहयोग करना चाहिए। बेटियां बोझ नहीं, परिवार की ताकत और गौरव हैं।

आगे बढ़ाएं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ : तनु

स्नातक की छात्रा तनु कुमारी कहती हैं कि मां जीवन की पहली गुरु और सबसे बड़ी ताकत होती हैं। मां की ममता, त्याग और संस्कार ही बेटियों को मुश्किलों से लड़ने का हौसला देते हैं।

बेटियों को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। समाज को भी उनके सपनों को पंख देने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि हर बेटी अपनी पहचान बना सके।

हर क्षेत्र में इबारत लिख रहीं बेटियां : पुष्पा

पुष्पा कुमारी कहती हैं कि अब बेटियां घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, खेल, विज्ञान, प्रशासन और सुरक्षा सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं।

बेटियां हवाई जहाज उड़ा रही हैं और ट्रेन चला रही हैं। ऐसे में उनकी क्षमता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। माता-पिता को बेटियों पर भरोसा कर उन्हें आगे बढ़ने का पूरा अवसर देना चाहिए।

सम्मान में जले दीप, सुरक्षा का संकल्प

नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 34 में बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के संकल्प के साथ दीप जलाए गए। मुख्य पार्षद पार्वती देवी के नेतृत्व में महिलाओं और छात्राओं ने दुर्गा माता के दरबार में बेटियों के नाम दीप प्रज्वलित किए।

सामाजिक नेत्री मधु देवी ने कहा कि बेटियां समाज की अनमोल धरोहर हैं। उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा सुरक्षा कवच बनकर खड़े रहेंगे।

बेटियों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और समान अवसर देना सबकी जिम्मेदारी है। मौके पर पुष्पा कुमारी, नीतू कुमारी, उषा देवी, तनु कुमारी सहित कई महिलाएं और छात्राएं मौजूद थीं।

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