‘गुटबाजी छिपाने के लिए असम के मुख्यमंत्री को बुलाया’, CM सुक्खू का दावा- BJP के 16 MLA दोबारा नहीं जीतेंगे

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राज्य ब्यूरो, शिमला। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मुख्य विपक्षी दल भाजपा पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा के वर्तमान 16 विधायक आगामी विधानसभा चुनाव में हार का सामना करेंगे और वे दोबारा जीतकर आने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इस समय आंतरिक रूप से पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है और आने वाले चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन पिछले चुनाव से भी अधिक निराशाजनक रहेगा।

दिल्ली से लौटकर सचिवालय में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि मेरे इस दावे को पूरी गंभीरता और विश्वास के साथ दर्ज किया जाए। जब चुनाव के नतीजे सामने आएंगे, तब इस विषय पर दोबारा बात की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा अंदरूनी कलह से जूझ रही है और अपनी साख बचाने के लिए कांग्रेस सरकार पर अनर्गल आरोप मढ़ रही है।

असम के मुख्यमंत्री को देंगे शपथ ग्रहण का न्योता
मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी के भीतर पांच गुट इस कदर हावी हैं कि उन्हें एकजुट करने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को हिमाचल लाना पड़ा। असम के मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस सरकार की गारंटियों पर उठाए गए सवालों और नेताओं पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के मुद्दे उठाना और यात्राएं निकालना विपक्ष का अधिकार है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री ने अगले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की बात कही है। जब राज्य में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनेगी, तो लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार सभी मुख्यमंत्रियों की तरह असम के मुख्यमंत्री को भी विधिवत निमंत्रण भेजा जाएगा।

कांग्रेस द्वारा आयोजित विशाल रैली का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया है, जिससे स्पष्ट है कि जनसमर्थन सरकार के साथ है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एसआइआर के माध्यम से होने वाली कथित अनियमितताओं और धांधली को रोकने की लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसे जनता का व्यापक समर्थन मिला है। उन्होंने भाजपा की ओर से ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पर लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज किया।

वित्तीय घाटे के बावजूद आर्थिकी को संभाला
प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बावजूद राज्य सरकार ने आर्थिक चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया है। उन्होंने बताया कि राज्य के बजट में लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये की सीधी कटौती हुई है। इसे एक व्यावहारिक उदाहरण से समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, यदि किसी परिवार की मासिक आय 50 हजार या एक लाख रुपये हो और उसमें से अचानक 15 से 20 हजार रुपये काट लिए जाएं, तो पूरे महीने का बजट लड़खड़ा जाता है।

सरकार भी एक परिवार की तरह होती है। इस भारी वित्तीय कटौती के बावजूद हमने वित्तीय अनुशासन और व्यवस्था परिवर्तन के दम पर प्रदेश को संभाला है।

न लूट रहे हैं, न लूटने देंगे
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की कुंजी राज्य की प्राकृतिक और जल संपदा में निहित है। सरकार राज्य के संसाधनों के दोहन और बर्बादी को पूरी तरह रोकेगी। कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, हिमाचल की जो संपदा है, उस संपदा को न तो हम लूटने दे रहे हैं, न ही लूट रहे हैं और न ही कभी लूटने देंगे। न ही इसे लुटाया जाएगा। प्रदेश के संसाधनों का एक-एक पैसा केवल हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस्तेमाल होगा।

 

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