लोक आस्था का महापर्व छठ को लेकर सिमरी बख्तियारपुर सहित आसपास के इलाकों में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस चार दिवसीय महापर्व को लेकर बाजारों की धीरे-धीरे रौनक बढ़ने लगी है।
छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाली पूजन सामग्री और फल-फूल की मांग को देखते हुए दुकानदार भी अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। इस बार महापर्व में तमिलनाडु से मंगाए जाने वाले नारियल की खास चर्चा।
दक्षिण भारत से आने वाले नारियल से ही सिमरी बख्तियारपुर, बलवाहाट, सलखुआ, बनमा ईटहरी सहित आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छठव्रती भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करेंगी।
छठ पूजा में नारियल का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे पवित्र फल के रूप में पूजा की डलिया में प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। व्रती सूप और डाला में नारियल, केला, ईख, सेब, संतरा, अदरक, हल्दी, मूली सहित विभिन्न प्रकार के फल और पूजन सामग्री सजाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
दक्षिण भारत से स्थानीय बाजार में पहुंचता है नारियल
स्थानीय बाजारों में बिकने वाले नारियल की के लिए व्यापारियों को दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। तमिलनाडु से आने वाले नारियल की खेप स्थानीय व्यापारियों तक पहुंचती है।
वहां से थोक विक्रेताओं के माध्यम से छोटे दुकानदारों और ग्रामीण बाजारों तक नारियल पहुंचाया जाता है। पर्व के दौरान मांग में अचानक वृद्धि होने के कारण व्यापारी पहले से ही पर्याप्त स्टॉक रखने की तैयारी करते हैं, ताकि श्रद्धालुओं को खरीदारी में परेशानी नहीं हो।
फल और पूजन सामग्री की खरीदारी भी होगी तेज
सिमरी बख्तियारपुर के मुख्य बाजार, रानीबाग, स्टेशन चौक, शर्मा चौक सहित आसपास के हाट-बाजारों में छठ पूजा से जुड़ी सामग्री की दुकानें सजने लगी हैं।
बांस से बने सूप, डाला, टोकरी, मिट्टी के हाथी, दीपक और अन्य पूजन सामग्री की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा केला, ईख, सेब, संतरा, नारियल और अन्य मौसमी फलों की बिक्री में भी तेजी आएगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

