प्रतिबंधित संगठन ULFA की तारीफ करके फंसे असम के मंत्री, सीएम हिमंता सरमा ने दिया स्पष्टीकरण

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असम के मंत्री बिस्वजीत दैमारी ने ‘यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम’ (ULFA) पर एक ऐसा बयान दे दिया कि खुद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को सामने आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा।

बिस्वजीत दैमारी ने प्रतिबंधित संगठन ULFA की तारीफ कर दी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने कहा, ‘इस प्रतिबंधित संगठन ने पांच दशकों से भी ज्यादा समय तक बाहरी ताकतों से राज्य की रक्षा की है।’

मुख्यमंत्री ने दिया स्पष्टीकरण

तिनसुकिया के काकोपाथर में मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान बिस्वजीत दैमारी ने यह टिप्पणी की। इसके बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सामने आकर स्पष्ट किया कि खेल और युवा कल्याण मंत्री, अनूप चेतिया के नेतृत्व वाले गुट की बात कर रहे थे, न कि परेश बरुआ के नेतृत्व वाले प्रतिबंधित ‘ULFA (इंडिपेंडेंट)’ की।

गुरुवार को तिनसुकिया में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, ‘दैमारी ने मुझे बताया कि वह अनूप चेतिया के नेतृत्व वाले ULFA गुट की बात कर रहे थे, जो बातचीत के लिए आगे आया और जिसने सरकार के साथ समझौता किया। वह परेश बरुआ के ‘ULFA (इंडिपेंडेंट)’ की बात नहीं कर रहे थे, जो अभी भी एक प्रतिबंधित संगठन है।’

ULFA को दिया असम की रक्षा का क्रेडिट

बिस्वजीत दैमारी के बयान का वीडियो भी सामने आया, जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘ULFA की वजह से, पिछले 50 सालों में कोई भी असम की तरफ आंख उठाकर नहीं देख सका।’

दैमारी ने आगे कहा, ‘जिन लोगों ने ULFA को मुख्य नेतृत्व प्रदान किया, वे मोरन और मटक समुदायों से थे। यहां तक कि परेश बरुआ (ULFA प्रमुख) भी मटक समुदाय से ही आते हैं। अगर मोरन और मटक समुदायों का योगदान न होता, तो पिछले पांच दशकों में राज्य के हालात बिल्कुल अलग होते।’

विपक्ष ने की जांच की मांग

असम महिला कांग्रेस की अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर गोस्वामी ने कहा है कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर, ‘गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) के तहत प्रतिबंधित एक संगठन के बारे में दैमारी की टिप्पणियों पर चिंता जताई है।

अपने पत्र में, बोरठाकुर ने मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है और केंद्र सरकार से उनके भाषण के पूरे संदर्भ की जांच करने को कहा है।

ULFA संगठन में कौन लोग?

सरकार के साथ बातचीत को लेकर मतभेद पैदा होने के बाद ULFA दो गुटों में बंट गया था। अनूप चेतिया के नेतृत्व वाला गुट शांति प्रक्रिया में शामिल हो गया और उसने केंद्र तथा असम सरकार के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए।

वहीं परेश बरुआ के नेतृत्व वाला ULFA (इंडिपेंडेंट) बातचीत से दूर रहा और उस पर अभी भी प्रतिबंध लगा हुआ है।

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