IIT Kanpur को मिली बड़ी जिम्मेदारी, 104.28 करोड़ से सरकारी डिजिटल सिस्टम की 24 घंटे निगरानी, साइबर हमलों पर तत्काल कार्रवाई

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त्तर प्रदेश के सरकारी विभागों, डिजिटल नेटवर्क और नागरिक सेवाओं को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी गई है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पकड़े जाएंगे साइबर हमले

साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनके माध्यम से नेटवर्क पर होने वाली असामान्य गतिविधियों और संभावित साइबर हमलों की पहचान की जाएगी। सुरक्षा संबंधी घटनाओं का विश्लेषण करने और उनके जवाब में तत्काल कदम उठाने के लिए स्वचालित प्रणालियां भी विकसित की जाएंगी।

चना सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच

इसके अलावा सरकारी विभागों की सूचना सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच होगी। सुरक्षा संबंधी कमजोरियों का आकलन करने के साथ ही मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों के समन्वय से समय-समय पर साइबर सुरक्षा अभ्यास और कृत्रिम हमलों के जरिए तैयारियों की परख की जाएगी।

राष्ट्रीय संस्थानों के लिए भी केंद्र स्थापित कर चुका है सी3आइहब

आईआईटी के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने इस फैसले को प्रदेश के डिजिटल ढांचे की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक से नागरिकों को मिलने वाली जरूरी सेवाएं बाधित हो सकती हैं और संवेदनशील आंकड़ों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

इन संस्थानों के लिए पहले ही स्थापित किया सुरक्षा तंत्र

उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर का सी3आइहब इससे पहले भारतीय इस्पात प्राधिकरण के भिलाई इस्पात संयंत्र, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और भारतीय पत्तन संघ जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के लिए भी साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र स्थापित कर चुका है। इन संस्थानों में काम करने के अनुभव और विकसित तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ अब उत्तर प्रदेश के सरकारी डिजिटल तंत्र को सुरक्षित बनाने में मिलेगा।

इसकी स्थापना, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साइबर सुरक्षा नवाचार केंद्र (सी3आइहब) को सौंपी गई है। परियोजना के लिए शुरुआती तीन वर्षों में 104.28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस केंद्र के माध्यम से प्रदेश के सभी सरकारी विभागों के डिजिटल नेटवर्क, आवेदन प्रणालियों, आंकड़ा भंडार और महत्वपूर्ण सूचना तंत्र की चौबीस घंटे निगरानी की जाएगी। इसका उद्देश्य साइबर हमलों और संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान करना, संभावित खतरों का आकलन करना और सुरक्षा में सेंध लगने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इसके दायरे में सूचना प्रौद्योगिकी के साथ औद्योगिक और संचालन संबंधी तकनीकी तंत्र भी शामिल होंगे।

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