मुरादाबाद: 1.02 अरब का ROB और High-Tension लाइन का ‘पेच’, अब 2027 तक झेलना पड़ेगा जाम और धूल!

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 पंडित नगला बाइपास के आरओबी को मानो टावर की नजर लग गई है। सात माह से निर्माण ठप है और हाईटेंशन लाइन के टावर हटने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। करीब 1.02 अरब रुपये की लागत से बन रहे इस आरओबी की समय सीमा दो बार बढ़ाई जा चुकी है। अब दिसंबर 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सवाल यह है कि जब बाधा की जानकारी पहले से थी तो उसे समय रहते दूर क्यों नहीं किया गया? सात माह की देरी के लिए बिजली विभाग जिम्मेदार है या सेतु निगम? जवाबदेही आखिर तय कौन करेगा?

शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए शुरू हुई यह परियोजना अब खुद यातायात की परेशानी बन गई है। सर्विस रोड पर रोजाना वाहन जाम में फंस रहे हैं। निर्माण स्थल के आसपास धूल उड़ने से लोगों को परेशानी हो रही है।

नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और स्कूली बच्चों को आवाजाही में दिक्कत झेलनी पड़ रही है। जाम में ईंधन की बर्बादी के साथ एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों के फंसने का जोखिम भी बना रहता है।

निर्माण एजेंसी के प्रबंधक नरेंद्र कुमार का कहना है कि आरओबी के अधूरे हिस्से के ऊपर से 440 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। लाइन हटने के बाद ही निर्माण शुरू हो सकेगा।

सेतु निगम के सहायक अभियंता ओमप्रकाश ने बताया कि टावर नहीं हटने के कारण अप्रैल 2026 से काम बंद है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने 31 दिसंबर तक टावर हटाने का लिखित आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है।

सवाल यह है कि टावर हटाने की प्रक्रिया समय रहते क्यों नहीं शुरू कराई गई? बिजली विभाग और सेतु निगम के बीच समन्वय की जिम्मेदारी किसकी थी? निर्माण बंद रहने के सात माह में बाधा दूर कराने के लिए क्या कदम उठाए गए?

इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहे हैं। सेतु निगम के डीपीएम शशिकांत हाईटेंशन लाइन हटने की तारीख पर ठोस जवाब नहीं दे रहे। सीपीएम रजनीश यादव ने भी उनसे बात करने को कहकर टाल दिया। आखिर किसी की जवाबदेही तो तय करनी ही पड़ेगी।

83 प्रतिशत काम पूरा, पांच स्पान अधूरे

शहर को संभल व चंदौसी मार्ग से जोड़ने वाले से इस आरओबी कुल 19 स्पान का है, जिनमें तीन रेलवे के हिस्से में हैं। अब तक करीब 83 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। पांच स्पान और आरई आल का काम बाकी है।

टावर हटने के बाद भी निर्माण पूरा करने में करीब छह माह लगेंगे। ऐसे में दिसंबर 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य बिजली विभाग की कार्रवाई पर निर्भर है। एसपी यातायात रचना मिश्रा भी आरओबी को जाम की वजह बता चुकी हैं। इसके बावजूद निर्माण की बाधा दूर नहीं हुई।

जाम, धूल और ईंधन की बर्बादी

  • सर्विस रोड पर रोजाना जाम लगने से वाहन चालकों को अतिरिक्त समय गंवाना पड़ रहा है।
  • निर्माण स्थल के आसपास उड़ती धूल से लोगों को सांस और आंखों संबंधी परेशानी का खतरा है।
  • जाम में वाहनों के फंसने से पेट्रोल और डीजल की बर्बादी हो रही है।
  • स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और कारोबारियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
  • एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को रास्ता मिलने में देरी का जोखिम है।

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