शराणार्थियों की जांच में AI का इस्तेमाल कर रहा ब्रिटेन, मानवीय अधिकार समूह ने जताई चिंता

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ब्रिटेन का गृहमंत्रालय देश में शरण मांगने वाले लोगों की निगरानी और उनकी पहचान की जांच के लिए गोपनीय तरीके से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रहा है। प्रवासियों की वास्तविक उम्र के आकलन से लेकर नकली शादी पता करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा रही है।

डिजिटल अधिकारों की निगरानी करने वाले प्रमुख संगठन ओपन राइट्स ग्रुप ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे मानवाधिकारों और पारदर्शिता के लिए बड़ा खतरा बताया है।

किन कामों के लिए हो रहा है AI का इस्तेमाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक होम ऑफिस शरणार्थियों और प्रवासियों से जुड़े कई संवेदनशील स्तरों पर ऑटोमेटेड सिस्टम और AI टूल्स का सहारा ले रहा है जैसे शरण मांगने वाले किसी व्यक्ति की उम्र सही है या नहीं, इसका डेटा आधारित सत्यापन किया जा रहा है।

वीजा या नागरिकता के लिए की जाने वाली फर्जी शदियों के मामलों को फ्लैग करने में AI का इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्रिटेन पहुंचने वाले नए प्रवासियों के मोबाइल फोन के डिजिटल कटेंट और डेटा की जांच की जा रही है। शरणार्थियों के इंटरव्यू का सार तैयार करने में भी इस तकनीक की मदद ली जा रही है।

ओपन राइट्स ग्रुप ने जताई चिंता

ओपन राइट्स ग्रुप ने इसपर चिंताएं जताई हैं उन्होंने कहा कि यह समाज में भेदभाव बढ़ा सकता है। संगठन ने आशंका जताई है कि ये ब्रिटेन की एंटी इमिग्रेशन पॉलिसी से प्रभावित हो सकता है। संगठन ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर सरकार एआई के इस्तेमाल से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं कर रही है।

गलत फैसला बन सकता है जानलेवा खतरा

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एआई हमेशा सटीक नहीं होता। यह समाज में मौजूद पूर्वाग्रहों और भेदभाव को दोहरा सकता है। शरणार्थियों क मामलों में गलत आकलन किसी ऐसे व्यक्ति को खतरे में डाल सकता है जिसे अपने देश लौटने पर उत्पीड़न या हिंसा का सामना करना पड़े।

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