घाटी में विस्थापितों की संपत्तियों के हस्तांतरण से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं पर राजस्व विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभागीय जांच में गंभीर गड़बड़ी सामने आने के बाद पुलवामा के मोहम्मद शाहिद पंडित को जूनियर असिस्टेंट से निचले पद पर मल्टी-टास्किंग स्टाफ बना दिया है। वित्तीय आयुक्त (राजस्व) ने 27 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया।
रिकॉर्ड के रखरखाव में भी मिलीं कमियां
विभागीय जांच में सामने आया कि स्थानांतरण के बावजूद शाहिद संभागीय आयुक्त कार्यालय में काम करता रहा और विस्थापित संपत्तियों से जुड़े मामलों को संभालते रहा, जबकि संबंधित शाखा में उसकी तैनाती के लिए उचित आदेश उपलब्ध नहीं था।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वह सुनवाई के लिए मामलों की सूची तैयार करने, संपत्तियों के हस्तांतरण संबंधी आदेशों का मसौदा बनाने और उन्हें भेजने के काम में भी शामिल था। सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव में कमियां भी पाई गईं।
रिपोर्ट में शाहिद और उनके परिवार के खातों से जुड़े 82 लाख रुपये के ऑनलाइन लेनदेन का भी उल्लेख मिला। एसीबी द्वारा चिह्नित इन लेनदेन को लेकर रिपोर्ट ने नकद लेनदेन की स्थिति में राशि बढ़ने की संभावना जताई, लेकिन पूरी रकम को भ्रष्टाचार की कमाई साबित नहीं किया।
पहले निलंबन, फिर पदावनति
मोहम्मद शाहिद को 17 दिसंबर 2022 को निलंबित किया गया था। पहली जांच रिपोर्ट दिसंबर 2024 में रद्द कर नई जांच कराई गई। आरोपपत्र मिलने के बाद उन्होंने आरोपों से इनकार किया। नई रिपोर्ट 25 जनवरी 2025 को सौंपी गई।
संभागीय आयुक्त ने निचले पद पर भेजने या सात साल तक पदोन्नति रोकने, दस साल तक गैर-संवेदनशील पदों पर तैनाती और एक माह के वेतन के बराबर जुर्माने के विकल्प सुझाए थे।
सक्षम प्राधिकारी ने जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा नियम, 1956 के नियम 30 के तहत नीचले पद पर नियुक्त करने का फैसला किया। आदेश के अनुसार, आपराधिक मामले के परिणाम के आधार पर सजा में संशोधन किया जा सकता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

