जिस बेटे ने देश के लिए दी जान, उसकी टूटी प्रतिमा एक माह तक नहीं सुधरी; मां ने खुद खर्च कर फिर लगवाई मूर्ति
बलिदानी संतोष उरांव की प्रतिमा टूटने के करीब एक माह बाद भी उसके पुनर्स्थापन को लेकर प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से ठोस पहल नहीं होने के बाद उनकी माता गीता देवी ने अपने खर्च से बेटे की प्रतिमा दोबारा स्थापित करा दी।
लोगों का कहना है कि देश के लिए बलिदान देने वाले जवान की प्रतिमा का सम्मानजनक तरीके से पुनर्स्थापन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता होनी चाहिए थी। एक माह तक प्रतिमा के टूटे रहने और अंततः मां को अपने खर्च से प्रतिमा लगवाने की स्थिति को लोगों ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। लोगों ने बलिदानी के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि शहीद का सम्मान केवल समारोहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे मामलों में तत्काल पहल दिखनी चाहिए।
कोई भी बलिदानी केवल अपने परिवार या गांव का नहीं, बल्कि पूरे देश का होता है। बलिदानी को सम्मान देना समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थापित होने के महज दो वर्ष के भीतर टूटकर गिर जाना उसकी मजबूती और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। प्रतिमा टूटने के बाद उसका मलबा सड़क पर पड़ा रहा, यह भी गंभीर विषय है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

