पंजाब में नदियों और ड्रेनों की डी-सिल्टिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने अपना पक्ष रखा है। सरकार ने कहा है कि बाढ़ प्रबंधन, जलप्रवाह क्षमता बहाल करने और तटबंधों की सुरक्षा के लिए की जाने वाली वास्तविक डी-सिल्टिंग को व्यावसायिक खनन के बराबर नहीं माना जा सकता।
सरकार का तर्क है कि डी-सिल्टिंग पर पूरी तरह रोक लगाने से बाढ़ प्रबंधन और आपदा से बचाव से जुड़े जरूरी काम प्रभावित होंगे। राज्य ने कहा कि नदियों और ड्रेनों में जमा गाद को हटाना उनकी जलवहन क्षमता बनाए रखने के साथ-साथ भविष्य में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए जरूरी है।
2025 की बाढ़ का दिया हवाला
पंजाब सरकार ने NGT के समक्ष वर्ष 2025 में आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए डी-सिल्टिंग की जरूरत बताई। सरकार के मुताबिक, 2025 के मानसून के दौरान राज्य में 622.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक थी। इस दौरान सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर नदी तंत्र में भी काफी अधिक पानी आया।
सरकार ने बताया कि बाढ़ से नदी चैनलों, ड्रेनों, तटबंधों और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने जलमार्गों की जलप्रवाह क्षमता बहाल करने और बाढ़ प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने के लिए निवारक एवं सुधारात्मक कार्य शुरू किए।
डी-सिल्टिंग और व्यावसायिक खनन में अंतर
राज्य सरकार ने NGT में कहा कि रखरखाव, पुनर्बहाली और आपदा प्रबंधन के लिए की जाने वाली डी-सिल्टिंग को रेत या अन्य खनिजों के व्यावसायिक दोहन से अलग रखा जाना चाहिए। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि डी-सिल्टिंग के नाम पर व्यावसायिक खनन को अनुमति नहीं दी जाएगी।
सरकार के मुताबिक, यदि किसी गतिविधि का वास्तविक उद्देश्य व्यावसायिक खनन है तो उसे डी-सिल्टिंग की आड़ में नहीं कराया जा सकता। इसी वजह से पर्यावरणीय नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन जरूरी बताया गया है।
NGT के निर्देश के बाद जारी हुई SOP
सरकार ने NGT के अंतरिम निर्देश का हवाला देते हुए बताया कि सरकारी एजेंसियों द्वारा रखरखाव और आपदा प्रबंधन के लिए डी-सिल्टिंग की जा सकती है, बशर्ते इसका इस्तेमाल व्यावसायिक रेत खनन के लिए न हो।
इसी के बाद जल संसाधन विभाग ने 15 जून 2026 को महत्वपूर्ण स्थानों पर नदी की जलप्रवाह क्षमता बहाल करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की। इसमें महत्वपूर्ण स्थलों की पहचान, तकनीकी आकलन और स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के आधार पर काम कराने की व्यवस्था की गई।
सरकार बोली- डी-सिल्टिंग पर पूरी रोक से प्रभावित होगा बाढ़ प्रबंधन
पंजाब सरकार ने NGT के समक्ष कहा कि बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन उसके वैधानिक दायित्वों का हिस्सा हैं। ऐसे में डी-सिल्टिंग पर व्यापक रोक से इन कार्यों में बाधा आ सकती है।
राज्य ने यह भी कहा कि जहां डी-सिल्टिंग की जरूरत है, वहां वैज्ञानिक और तकनीकी आकलन के आधार पर काम कराया जाना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गाद निकालने की प्रक्रिया की आड़ में अवैध या व्यावसायिक खनन न हो।
इस मामले में एक ओर पंजाब सरकार डी-सिल्टिंग को बाढ़ प्रबंधन के लिए जरूरी बता रही है, वहीं पर्यावरणीय नियमों और संभावित व्यावसायिक खनन को लेकर NGT में मामला विचाराधीन है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

