मां दुर्गा की भक्ति और श्रेया घोषाल की आवाज का जादू, इस बंगाली गीत के बिना अधूरा है पूजा पंडाल; धुनुची नाच में झूमते हैं श्रद्धालु
बंगाल की दुर्गा पूजा अपनी भव्य सजावट, मां दुर्गा की आराधना, ढाक की गूंज और पारंपरिक नृत्य के लिए दुनियाभर में मशहूर है। पूजा पंडालों में बजने वाले भक्ति गीत इस उत्सव की रौनक को और बढ़ा देते हैं। खास तौर पर बंगाली देवी गीतों की मधुर धुन श्रद्धालुओं को भक्ति और उत्साह से भर देती है।
श्रेया घोषाल की आवाज में गाए गए बंगाली गीत भी दुर्गा पूजा के संगीत का हिस्सा हैं। इन गीतों के बीच जब ढाक की थाप गूंजती है, तो पंडालों में धुनुची नाच का माहौल बन जाता है। पारंपरिक परिधान पहने श्रद्धालु मां दुर्गा के सामने नृत्य कर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
क्या है धुनुची नाच की खासियत?
धुनुची नाच बंगाली दुर्गा पूजा की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। इसमें मिट्टी या दूसरे पारंपरिक पात्र में धूप जलाकर श्रद्धालु ढाक की ताल पर नृत्य करते हैं। पूजा के दौरान खासकर सप्तमी, अष्टमी और नवमी के अवसर पर कई पंडालों में धुनुची नाच देखने को मिलता है।
इस नृत्य में भक्ति के साथ तालमेल, संतुलन और ऊर्जा का अनूठा मेल नजर आता है। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक कपड़ों में मां दुर्गा के सामने नृत्य करते हैं। कई जगह धुनुची नाच की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं।
बंगाली गीतों के बिना अधूरा लगता है उत्सव
दुर्गा पूजा में संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। ढाक की आवाज, शंखनाद, मंत्रोच्चार और देवी गीत मिलकर ऐसा माहौल तैयार करते हैं, जिसमें श्रद्धा और उत्सव एक साथ दिखाई देते हैं।
श्रेया घोषाल की सुरीली आवाज ने बंगाली संगीत को व्यापक पहचान दिलाई है। हालांकि, यहां जिस खास गीत का जिक्र है, उसका नाम और फिल्म या एल्बम की जानकारी स्पष्ट नहीं है। इसलिए गीत से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी की पुष्टि जरूरी है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

