बड़ी बहन से प्रेरित होकर अनाहत ने थामा स्क्वॉश रैकेट, माता-पिता के त्याग से रचा इतिहास
बड़ी बहन से प्रेरित होकर अनाहत ने थामा स्क्वॉश रैकेट, माता-पिता के त्याग से रचा इतिहास
भारतीय स्क्वॉश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने कम उम्र में ही अपने खेल से देश का ध्यान खींचा है। स्क्वॉश कोर्ट तक पहुंचने की उनकी कहानी में बड़ी बहन से मिली प्रेरणा के साथ माता-पिता के समर्पण की भी अहम भूमिका रही है। परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत के दम पर अनाहत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और भारतीय स्क्वॉश के इतिहास में खास उपलब्धि दर्ज की।
बड़ी बहन को देखकर स्क्वॉश से जुड़ीं अनाहत
अनाहत सिंह का स्क्वॉश से जुड़ाव उनकी बड़ी बहन के खेल से प्रभावित होकर हुआ। बहन को स्क्वॉश खेलते देखकर अनाहत की भी इस खेल में रुचि बढ़ी। इसके बाद उन्होंने रैकेट थामा और धीरे-धीरे प्रतियोगी स्तर पर अपनी जगह बनानी शुरू कर दी।
कम उम्र में खेल की शुरुआत करने वाली अनाहत ने प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के साथ अपने खेल को लगातार निखारा। उनकी तेज गति, कोर्ट पर बेहतर मूवमेंट और दबाव में खेलने की क्षमता ने उन्हें जूनियर स्तर पर अलग पहचान दिलाई।
माता-पिता ने निभाई अहम भूमिका
अनाहत की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है। खेल में आगे बढ़ने के लिए नियमित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना और लगातार यात्रा करना जरूरी था। परिवार ने इन सभी चुनौतियों के बीच उनका साथ दिया।
अनाहत के माता-पिता ने उनकी ट्रेनिंग और खेल करियर को प्राथमिकता देते हुए कई स्तरों पर त्याग किया। इसी समर्थन ने उन्हें अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने और बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया।
कम उम्र में हासिल की बड़ी उपलब्धियां
अनाहत ने जूनियर और सीनियर स्तर पर कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन ने यह दिखाया कि भारतीय स्क्वॉश में नई पीढ़ी के खिलाड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उनकी उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे भारत में स्क्वॉश को लेकर युवा खिलाड़ियों की दिलचस्पी भी बढ़ी है।
परिवार के समर्थन से अंतरराष्ट्रीय पहचान
अनाहत की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किसी खिलाड़ी की सफलता के पीछे केवल कोर्ट पर की गई मेहनत नहीं होती। प्रशिक्षण, परिवार का सहयोग, लगातार प्रतियोगिताओं का अनुभव और मानसिक दृढ़ता भी खेल करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
बड़ी बहन से मिली शुरुआती प्रेरणा से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का अनाहत का सफर भारतीय खेल जगत में एक नई पीढ़ी की कहानी पेश करता है। उनके प्रदर्शन पर अब देशभर के खेल प्रशंसकों की नजर बनी हुई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

