शरद पूर्णिमा पर ‘चंद्रिका’ के बिना अधूरा है लड्डू गोपाल का शृंगार, पोशाक से लेकर पूजा तक के हैं विशेष नियम
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी के दर्शन करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। वहीं, श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा और सेवा करने वाले भक्तों के लिए भी यह दिन खास होता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर लड्डू गोपाल का ‘श्वेत शृंगार’ करने और उन्हें खीर का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं कि इस दिन लड्डू गोपाल की पोशाक कैसी होनी चाहिए और पूजा के दौरान किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
शरद पूर्णिमा के दिन लड्डू गोपाल के श्रृंगार में एक विशेष चीज और जुड़ जाती है, जिसे चांदनी कहा जाता है। इसे कई लोग चंद्रिका आभूषण के नाम से भी पुकारते हैं। इसे तब पहनाया जाता है, जब लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है। खासतौर पर शरद पूर्णिमा जैसे पर्व जब कान्हा जी को महारास के लिए तैयार किया जाता है, तो मुकुट के साथ चंद्रिका पहनाने से उनका रूप और भी ज्यादा मनमोहक लगने लगता है।
अभिषेक के बाद मुलायम और साफ कपड़े से लड्डू गोपाल को पोंछें। फिर उन्हें नई पोशाक पहनाएं और चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद फूलों से उनका आसन सजाएं और दीपक जलाकर पूजा करें।
लड्डू गोपाल को लगाएं खीर और माखन-मिश्री का भोग
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने की विशेष रीति है। इस दिन आप गाय के दूध, चावल और चीनी से खीर बना लें। इसके अलावा लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री, फल और अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखना चाहिए। इसके लिए खीर को साफ बर्तन में रखें और स्वच्छ जाली या ढक्कन से ढक दें, ताकि उसमें धूल या कीड़े न गिरें। इसके बाद खीर को कुछ समय के लिए चांदनी में रखा रहने दें। बाद इसी खीर को परिवार सहित खुद भी ग्रहण करें।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

