पितरों का श्राद्ध करने से मिलते हैं यश-धन समेत 13 महाफल? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं श्राद्ध के महत्व
पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए श्राद्ध और तर्पण की परंपरा निभाई जाती है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में श्राद्ध को पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। गरुड़ पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में पितृ कर्म और श्राद्ध के महत्व का वर्णन मिलता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि, यश और शांति आने की मान्यता है। इसी आधार पर श्राद्ध से जुड़े कई शुभ फलों का उल्लेख धार्मिक परंपराओं में किया जाता है।
वहीं, मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि पितरों के लिए निर्धारित कर्मों की उपेक्षा करने से पितृ दोष जैसी अवधारणाओं से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन बातों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि के साथ किए गए इन कर्मों का उद्देश्य पितरों का स्मरण करना और उनके प्रति सम्मान प्रकट करना है।
धार्मिक ग्रंथों में श्राद्ध के महत्व को लेकर अलग-अलग प्रसंग और मान्यताएं मिलती हैं। इसलिए 13 महाफल या श्राप जैसी बातों को धार्मिक विश्वास के संदर्भ में समझना उचित है, न कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

