उत्तर प्रदेश में बारिश से 125 मिलियन यूनिट घट गई बिजली की खपत, बिजली प्रबंधन को मिली राहत

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उत्तर प्रदेश में बारिश से 125 मिलियन यूनिट घट गई बिजली की खपत, बिजली प्रबंधन को मिली बड़ी राहत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बारिश का असर बिजली की मांग पर भी देखने को मिला है। लगातार बारिश और मौसम में बदलाव के कारण बिजली की खपत में कमी दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में बिजली की खपत करीब 125 मिलियन यूनिट (एमयू) तक घट गई, जिससे बिजली प्रबंधन को कुछ राहत मिली है।

बारिश से कम हुई बिजली की मांग

गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के ज्यादा इस्तेमाल के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में तापमान में गिरावट और बारिश होने पर घरेलू बिजली खपत में कमी आती है। उत्तर प्रदेश में भी बारिश के चलते बिजली की मांग में गिरावट का असर पावर सिस्टम पर पड़ा है।

बिजली की मांग कम होने से उत्पादन और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना आसान हुआ है। इससे पावर कॉरपोरेशन और बिजली प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को पीक डिमांड के दौरान आपूर्ति व्यवस्था संभालने में मदद मिलती है।

यूपी में बिजली की खपत का बड़ा आंकड़ा

केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश की ऊर्जा आवश्यकता करीब 1,65,090 मिलियन यूनिट रही, जबकि 1,64,786 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की गई थी। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक प्रदेश की ऊर्जा आवश्यकता 1,29,329 मिलियन यूनिट और आपूर्ति 1,29,304 मिलियन यूनिट दर्ज की गई थी।

इससे साफ है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मौसम के बदलाव का बिजली की मांग और पूरे पावर मैनेजमेंट सिस्टम पर सीधा असर पड़ता है।

बिजली प्रबंधन को मिली राहत

बारिश के कारण मांग घटने से बिजली व्यवस्था पर पीक आवर्स का दबाव भी कम हो सकता है। गर्मी के दौरान जब मांग तेजी से बढ़ती है, उस समय बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव रहता है। मांग में कमी आने से उपलब्ध बिजली का प्रबंधन अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।

केंद्र के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में फरवरी 2026 तक देशभर में ऊर्जा आवश्यकता और बिजली आपूर्ति के बीच अंतर काफी कम रहा। इस अवधि में देश की ऊर्जा आवश्यकता 15,59,936 एमयू और आपूर्ति 15,59,482 एमयू रही।

मौसम का आगे भी रहेगा असर

बारिश और तापमान में बदलाव के कारण बिजली की मांग में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि बारिश का दौर आगे भी बना रहता है तो कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल कम होने से खपत पर दबाव घट सकता है। वहीं मौसम साफ होने और तापमान बढ़ने पर बिजली की मांग दोबारा बढ़ने की संभावना रहती है।

इस लिहाज से उत्तर प्रदेश में बिजली प्रबंधन के लिए मौसम के अनुसार मांग का अनुमान लगाना अहम है। फिलहाल बारिश के कारण खपत में आई कमी ने बिजली व्यवस्था को कुछ राहत जरूर दी है।

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