कश्मीर की लोक संस्कृति में एक ऐसा नाटक भी है, जो बिना किसी लिखित स्क्रिप्ट के मंचित किया जाता है—इसे कहा जाता है ‘भांड पाथेर’।
‘भांड पाथेर’ कश्मीर की पारंपरिक लोक-नाट्य शैली है, जिसमें कलाकार अपने अभिनय, संवाद और हास्य के जरिए समाज और सत्ता से जुड़े मुद्दों पर व्यंग्य करते हैं।
इसकी खासियत है कि कलाकार अक्सर मौके और परिस्थिति के हिसाब से संवाद गढ़ते हैं। यही वजह है कि हर प्रस्तुति में स्थानीय घटनाओं और सामाजिक मुद्दों का रंग दिखाई दे सकता है।
हंसी-मजाक और व्यंग्य के माध्यम से ‘भांड पाथेर’ गंभीर बातों को भी लोगों तक सहज तरीके से पहुंचाने की कोशिश करता है।
यानी, बिना लिखी स्क्रिप्ट, लोकभाषा और हास्य-व्यंग्य के जरिए कश्मीर की सामाजिक और सांस्कृतिक आवाज को मंच पर जीवंत करने वाली एक अनोखी परंपरा—भांड पाथेर।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

