EMIL बंधा कोल माइंस की प्रताड़ना जारी! 65 वर्षीय किसान ने उठाया आत्मघाती कदम, कंपनी के जिम्मेदार मदमस्त?

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सिंगरौली। बंधा कोल ब्लॉक परियोजना में जमीन, मकान, पेड़ और मुआवजे को लेकर प्रभावित ग्रामीणों की नाराजगी अब गंभीर रूप लेती दिखाई दे रही है। इसी बीच 65 वर्षीय किसान विश्वनाथ बिंद द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की घटना ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। हाल ही में सामने आए वीडियो में विश्वनाथ बिंद पेड़ पर चढ़े दिखाई दे रहे हैं। परिजनों और ग्रामीणों ने समय रहते उन्हें नीचे उतारा और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी जान बच सकी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार का कहना है कि कोल परियोजना से उनका मकान और जमीन प्रभावित हो रहे हैं तथा मुआवजे को लेकर उनकी शिकायत बनी हुई है।

जमीन और पुश्तैनी संपत्ति प्रभावित, तो मुआवजा कहां?

विश्वनाथ बिंद के परिवार का दावा है कि परियोजना के कारण उनकी पुश्तैनी संपत्ति प्रभावित हो रही है। परिवार का कहना है कि वर्षों से जिस महुआ के पेड़ से उनकी आजीविका जुड़ी थी, वह भी परियोजना क्षेत्र में आ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर विवाद के दौरान यह आत्मघाती प्रयास हुआ। बंधा कोल ब्लॉक के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर बंधा समेत पांच गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन तथा अवार्ड से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं।

पहले भी आत्महत्या की घटना:

सूत्र बताते हैं कि अनूप सिंह पिता बबन सिंह, उम्र करीब 30 वर्ष, निवासी पचौर-बाड़ीझरिया टोला, ने 22 अगस्त 2026 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी और ग्रामीण इस घटना को भी विस्थापन एवं मुआवजे से जुड़े तनाव से जोड़कर देख रहे हैं।

अब माइंस घेराव की तैयारी?

विश्वनाथ बिंद की घटना के बाद प्रभावित ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ने की बात सामने आ रही है। ग्रामीण मुआवजे, जमीन, मकान और पेड़ों से जुड़े अधिकारों को लेकर प्रशासन के सामने अपनी मांग रखने और परियोजना क्षेत्र में विरोध की तैयारी की बात कह रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार के पुराने रिकॉर्ड में EMIL Mines & Mineral Resources Ltd. द्वारा भूमि मुआवजे की राशि का एक हिस्सा कलेक्टर के पास जमा किए जाने का उल्लेख है। वहीं, बाद के सरकारी रिकॉर्ड और न्यायिक दस्तावेज बताते हैं कि बंधा कोल ब्लॉक से जुड़ी भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर प्रभावित लोगों के स्तर पर शिकायतें और कानूनी मामले भी सामने आए हैं।

प्रभावित परिवारों को उनका पूरा और वैधानिक मुआवजा कब?

एक ओर कोल ब्लॉक परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, तो दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीण जमीन, मकान, पेड़ और पुनर्वास को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विश्वनाथ बिंद की घटना ने प्रशासन के सामने भी यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रभावित परिवारों की शिकायतों का समाधान समय रहते क्यों नहीं हो पा रहा।

द टकसाल न्यूज़ की पड़ताल में अब नजर रहेगी; मुआवजे की प्रक्रिया में किन परिवारों को भुगतान हुआ, किनके मामले लंबित हैं और ग्रामीणों की शिकायतों पर प्रशासन तथा कंपनी प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष क्या है?

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