‘भर्ती नियमों से बाहर जाकर विज्ञापन में अतिरिक्त शर्तें जोड़ना अवैध’, हिमाचल हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं पर स्पष्ट किया है कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों से बाहर जाकर विज्ञापन में अतिरिक्त शर्तें जोड़ना अवैध है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को खारिज करते हुए अपीलकर्ता पिंकी को हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में कंडक्टर के पद पर नियुक्त करने के आदेश दिए। उन्हें वरिष्ठता सहित सभी काल्पनिक (नोशनल) लाभ देने के निर्देश भी दिए हैं।

मामला हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चार अप्रैल 2023 को जारी विज्ञापन से जुड़ा है। इसके तहत एचआरटीसी में कंडक्टर के 360 पदों के लिए आवेदन मांगे थे।

जोड़ दिया था विशेष नोट
विज्ञापन में आयोग ने विशेष नोट जोड़ दिया था, जिसके अनुसार सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए हिमाचल के भीतर स्थित स्कूलों से ही मैट्रिक और जमा दो उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया था, जबकि मूल हिमाचली निवासियों को इस शर्त से छूट थी। अपीलकर्ता पिंकी ने सामान्य श्रेणी के तहत आवेदन किया था और लिखित स्क्रीनिंग परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी।

… तो खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा

दस्तावेज सत्यापन के दौरान आयोग ने उनका आवेदन इसलिए रद कर दिया क्योंकि उन्होंने जमा दो की पढ़ाई हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड भिवानी से की थी और वह मूल रूप से हिमाचल की निवासी नहीं थीं। इसके खिलाफ पिंकी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

ऐसी पाबंदी लगाना कानूनन गलत

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि एचआरटीसी कंडक्टर भर्ती के लिए संशोधित नियम 2015 प्रभावी हैं, जिसमें शैक्षणिक योग्यता केवल किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से जमा दो उत्तीर्ण होना निर्धारित की है। नियमों में यह कहीं नहीं लिखा था कि पढ़ाई केवल हिमाचल के भीतर के स्कूल से ही होनी चाहिए।

हालांकि सरकार ने वर्ष 2019 में श्रेणी-तीन और दो पदों के लिए ऐसी शर्त लगाने संबंधी अधिसूचना जारी की थी, लेकिन एचआरटीसी ने इस भर्ती के लिए उस अधिसूचना को आधिकारिक तौर पर नहीं अपनाया था। कोर्ट ने कहा कि आरएंडपी नियमों के विपरीत विज्ञापन में ऐसी पाबंदी लगाना कानूनन गलत है।

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