सुप्रीम कोर्ट ने गिनाईं शराबबंदी की 5 बड़ी ‘बुराइयां’, पूछा- इससे क्या हासिल हुआ
शराबबंदी की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस पाबंदी से जुड़ी पांच बड़ी बुराइयों की ओर इशारा किया। इसके साथ ही, अदालत ने पिछले कुछ सालों में गुजरात और अन्य राज्यों में जहरीली शराब से हुई त्रासदियों का भी जिक्र किया।
सुप्रीम कोर्ट ने गिनाए शराबबंदी से जुड़े पांच नुकसान
- राजस्व की भारी क्षति: शराब की बिक्री पर रोक लगने से सरकार को मिलने वाले आबकारी शुल्क के रूप में एक बहुत बड़े राजस्व का नुकसान होता है।
- लागू करने का भारी खर्च: पूरे राज्य में कानून को सख्ती से लागू करने, निगरानी रखने और शराब तस्करी को रोकने के लिए सरकारी खजाने पर बहुत बड़ा वित्तीय बोझ पड़ता है।
- पुलिस तंत्र में भ्रष्टाचार: शराबबंदी की आड़ में गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे पुलिस और प्रशासन में घूसखोरी व भ्रष्टाचार का दायरा तेजी से फैलता है।
- अवैध और नकली शराब का धंधा: वैध शराब न मिलने के कारण अपराधी और माफिया सक्रिय हो जाते हैं, जिससे नकली, जहरीली और गैर-कानूनी शराब बनाने और बेचने का काला बाजार फलने-फूलने लगता है।
- नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन: शराब की अनुपलब्धता के कारण लोग नशे के अन्य खतरनाक विकल्पों की तरफ मुड़ जाते हैं, जिससे समाज में ड्रग्स के इस्तेमाल और उससे जुड़ी गंभीर समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं।
महाराष्ट्र पॉइजन रूल्स किए गए रद
जस्टिस जे बी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की पीठ ने महाराष्ट्र पॉइजन रूल्स के नियम 18A और 18B को रद करते हुए ये टिप्पणियां कीं। इन नियमों के तहत मेथनॉल की खरीद को प्रतिबंधित किया गया था।
इसे गैर-दवा निर्माताओं को बेचने से पहले इसमें कड़वा करने वाला पदार्थ और रंग मिलाना अनिवार्य कर दिया गया था। गौरतलब है कि ये नियम 1991 में मुंबई में मेथनॉल युक्त जहरीली शराब पीने से 93 लोगों की मौत के बाद बनाए गए थे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

