हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है, लेकिन शिक्षकों के वेतन का खर्च बना हुआ है। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं में एक विद्यार्थी पर औसतन 5219 रुपये प्रतिमाह, जबकि अपर प्राइमरी में 3915 रुपये प्रतिमाह खर्च आ रहा है। घटते नामांकन के बीच प्रति विद्यार्थी बढ़ता वित्तीय भार अब सरकारी स्कूलों के युक्तीकरण, शिक्षक तैनाती और नामांकन बढ़ाने की रणनीति के लिहाज से अहम हो गया है।
यू-डाइस आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में सरकारी स्कूलों की पहली से पांचवीं कक्षा में 3,04,132 विद्यार्थी पंजीकृत थे। 2025-26 में यह संख्या घटकर 2,18,969 रह गई। यानी पांच साल में 85,163 विद्यार्थी कम हुए। इसी अवधि में प्राथमिक शिक्षकों के वेतन पर 8397.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या घटने के साथ प्रति विद्यार्थी खर्च का आंकड़ा शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों के इस्तेमाल का महत्वपूर्ण संकेतक बन गया है।
आरटीई के तहत होगा निजी स्कूलों को भुगतान
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के पात्र विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति अब इन्हीं दरों के अनुसार करेगी। पिछले वर्ष की अपेक्षा इसे बढ़ाया गया है। प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति छात्र मासिक खर्च 5,219 रुपये, उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए 3,915 रुपये निर्धारित किए गए हैं। नई दरें वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए लागू रहेंगी। निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटे आरक्षित है। स्कूलों को इस फीस का भुगतान सरकार करती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

