आइआइटी बीएचयू के प्रो. विकास दुबे को काला-जार पर शोध के लिए एनएएमएस फेलोशिप

4.1kViews
1323 Shares

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वाराणसी (IIT-BHU) के स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर विकास कुमार दुबे को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (NAMS), इंडिया का फेलो चुना गया है। यह संस्था केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत है। प्रो. दुबे इस सम्मान को पाने वाले आइआइटी बीएचयू  वर्तमान में एकमात्र संकाय सदस्य हैं।

प्रो. दुबे को यह सम्मान बायोमेडिकल रिसर्च, प्रोटीन बायोकेमिस्ट्री, आणविक परजीवी विज्ञान, कोशिका मृत्यु की प्रक्रिया और उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए दवा खोज के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए मिला है। उनका प्रमुख शोध आंत संबंधी लीशमैनियासिस (काला-जार) के आणविक जीव विज्ञान और दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए नई उपचार रणनीतियों पर केंद्रित रहा है।

अपने अकादमिक करियर में, प्रो. दुबे ने 180 से अधिक शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं। उनके नाम भारत और अमेरिका में कई पेटेंट भी हैं। उन्होंने अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है और देश-विदेश के कई शोध संस्थानों के साथ मिलकर काम किया है।

आइआइटी बीएचयू में प्रो. दुबे ने डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट), एसोसिएट डीन (एकेडमिक अफेयर्स) और स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। वर्तमान में, वह सस्टेनेबल डेवलपमेंट सेंटर के समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं।

आइआइटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने प्रो. दुबे को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल संस्थान के लिए, बल्कि वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी गौरव का विषय है। इससे आइआइटी बीएचयू  की उच्च प्रभाव वाली बायोमेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में बढ़ती पहचान और मजबूत होगी।

प्रो. दुबे की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि यह आइआइटी बीएचयू के समर्पित शोध कार्यों की भी एक मिसाल है। उनके शोध कार्यों से न केवल काला-जार जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में मदद मिलेगी, बल्कि इससे वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा। प्रो. विकास दुबे की NAMS फेलोशिप प्राप्ति से IIT-BHU की प्रतिष्ठा में और वृद्धि होगी और यह संस्थान के शोध कार्यों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *