स्थानीय थाना क्षेत्र अंतर्गत कपूरपट्टी गांव से 15 दिनों तक गंगा की उफनती धाराओं में बहकर उत्तर प्रदेश के बलिया पहुंचने और लावारिस झोपड़ी के सहारे जीवित रहने की कहानी पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी साबित हुई है।
मिली जानकारी के मुताबिक, 29 अगस्त की सुबह घरेलू विवाद और आपसी क्लेश से नाराज होकर सुनैना देवी (56 वर्ष) बिना किसी को बताए चुपचाप घर से निकल गई थीं।
वे जीप और आटो बदलकर उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के थाना क्षेत्र अंतर्गत चैन छपरा स्थित अपने पति के ननिहाल पहुंच गईं और वहीं छिपकर रहने लगीं।
महिला ने अपने परिवार से संपर्क नहीं किया और ननिहाल के रिश्तेदारों ने भी उनकी जिद पर वहां होने की बात इटाढ़ी में रह रहे उनके स्वजन से छिपाए रखी।
गंगा में डूबने के दौरान महिला का रेस्क्यू
मामले में मोड़ 14 सितंबर को तब आया, जब गांव के पास ही गंगा स्नान के दौरान महिला गहरे पानी में डूबने लगीं। वहां मौजूद मल्लाहों (मछुआरों) ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और यूपी के हल्दी थाना पुलिस के हवाले कर दिया।जब मामला पुलिस तक पहुंचा और महिला के डूबने की बात सामने आई, तब ननिहाल के रिश्तेदारों को अपनी गलती का अहसास हुआ। इसके बाद महिला के पति और बेटे को सूचना दी गई।
बुधवार को जब महिला अपने पति और बेटे के साथ इटाढ़ी थाने पहुंची, तो उन्होंने महिला पुलिस अधिकारी के समक्ष घटना की पूरी सच्चाई बता दी।उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल घर के विवाद से तंग आकर पति के ननिहाल चली गई थीं और इतने दिनों तक वहीं सुरक्षित थीं। महिला ने बताया कि वह पहले भी वहां जाती रही हैं।
इटाढ़ी थाना पुलिस ने महिला का आधिकारिक बयान दर्ज कर लिया है। पुलिस अब महिला को न्यायालय में ले जाकर धारा 183 बीएनएस के तहत न्यायाधीश के समक्ष दंड प्रक्रिया के तहत बयान दर्ज कराने की तैयारी कर रही है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

