मिलिट्री इंटेलीजेंस की सूचना पर कैंट पुलिस ने अग्निवीर जनरल ड्यूटी के री-मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देकर रुपये वसूली करने वाले गिरोह का राजफाश किया है। पुलिस ने एक आरोपित राजेश तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा आरोपित गजेंद्र सिंह फरार है।
सूचना पर दारोगा राजीव पटेल, कांस्टेबल संदीप राणा और रोहित राणा मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ मिलिट्री अस्पताल के पास पहुंचे और लखनऊ के सैरपुर थाना क्षेत्र के मुबारकपुर निवासी राजेश तिवारी को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपित राजेश ने बताया कि उसके पिता भी सेना में थे और अब सेवानिवृत्त हैं। उसने पहले जबलपुर में सेना भर्ती की तैयारी कराने के लिए कुछ समय अकादमी चलाई थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात गजेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति से हुई, जो खुद को सेना में होना बताता था।
राजेश के अनुसार, उसे यह जानकारी नहीं है कि गजेंद्र वास्तव में सेना में है या नहीं। राजेश ने बताया कि सेना की भर्तियां बंद होने और अग्निवीर व्यवस्था शुरू होने के बाद उसकी रोजी-रोटी का साधन बंद हो गया।
इसके बाद उसने सेना का फर्जी कैंटीन पहचानपत्र तैयार कर लिया और खुद को रिटायर्ड हवलदार बताकर अग्निवीर मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने का भरोसा दिलाकर उनसे रुपये वसूलने लगा।
इस ठगी में गजेंद्र भी शामिल
पुलिस के मुताबिक, राजेश ने पूछताछ में बताया कि इस काम में वह और गजेंद्र सिंह साझेदार हैं। उसका मिलिट्री अस्पताल के डाक्टरों से कोई संपर्क नहीं है। वह फर्जी दस्तावेज, कूटरचित काल अप लेटर और अन्य अभ्यर्थियों के रेफरल लेटर दिखाकर री-मेडिकल में पास कराने के इच्छुक अभ्यर्थियों का विश्वास जीतता था।
अभ्यर्थियों की जानकारी वह गजेंद्र सिंह के वाट्सएप के माध्यम से भेजता था। इसके बाद अभ्यर्थियों को बताता था कि उनका आरएमडीएस नंबर सेना के अधिकारी गजेंद्र सिंह को भेज दिया गया है और उनका काम हो जाएगा। अभ्यर्थियों से रुपये लेने के बाद अपना हिस्सा रखकर शेष रकम गजेंद्र के बताए बैंक खाते में भेजने की बात भी सामने आई है।
मोबाइल में मिला 40 हजार रुपये का लेनदेन
पुलिस ने राजेश के पास से बरामद मोबाइल की जांच की तो उसमें कई अभ्यर्थियों के रेफरल लेटर और बैंक अकाउंट की हिस्ट्री मिली। जांच में सामने आया कि 21 अगस्त 2026 को दोपहर 2:44 बजे अंकित सिंह चौहान नाम के अभ्यर्थी की यूपीआई आइडी से 40,000 रुपये प्राप्त हुए थे।
अंकित सिंह चौहान का नाम आरोपित के रजिस्टर में भी दर्ज मिला। मोबाइल में गजेंद्र सिंह के नाम से वाट्सएप चैट भी मिली, जिसमें आरोपित की तरफ से अभ्यर्थियों के रेफरल फार्म भेजने और रुपये के लेनदेन को लेकर बातचीत थी। पुलिस ने चैट के स्क्रीनशाट भी सुरक्षित किए हैं।
नए अभ्यर्थियों को फंसाने पहुंचा था अस्पताल के पास
पुलिस के अनुसार, राजेश ने पूछताछ में स्वीकार किया कि 25 अगस्त को भी वह मिलिट्री अस्पताल के पास ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश में आया था, जिन्हें री-मेडिकल में पास कराने का झांसा देकर रुपये वसूले जा सकें। इससे पहले कि वह किसी अभ्यर्थी को अपने जाल में फंसा पाता, मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

