सरकारी स्कूल का अनोखा मॉडल: ‘मेरी त्रुटियां-मेरी सीख’ से दूर हो रही बच्चों की झिझक, हर तरफ तारीफ

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 कंपोजिट विद्यालय ढकिया जदीद बिलारी में पढ़ाई सिर्फ किताब और कापी तक सीमित नहीं है। शिक्षक बच्चों को गतिविधियों, टीएलएम और प्रिंट रिच सामग्री के जरिए विषयों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। कक्षा में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने के साथ उनकी झिझक दूर करने और खुद सीखने की आदत विकसित करने पर जोर है।

कक्षा एक से पांच तक संचालित विद्यालय में वर्तमान में 122 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इनमें 59 बालक और 63 बालिकाएं हैं। विद्यालय में छह शिक्षक हैं, जिनमें चार स्थायी शिक्षक और दो शिक्षामित्र हैं।

तीन कक्षों में कक्षाओं का संचालन होता है, जबकि कक्षा में ही पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है। प्रधानाध्यापक सिमी सदफ के नेतृत्व में शिक्षकों का प्रयास है कि बच्चे सवाल पूछें, अपनी गलतियों को समझें और बिना झिझक उन्हें सुधारते हुए आगे बढ़ें।

टीएलएम से किताब की बात को कक्षा में उतारने का प्रयास

कठिन विषयों और अवधारणाओं को बच्चों के लिए सहज बनाने में टीएलएम और प्रिंट सामग्री का सहारा लिया जाता है। शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने के बजाय उसे बच्चों के सामने गतिविधि और दृश्य सामग्री के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।इससे बच्चों के लिए नई चीजों को समझना और लंबे समय तक याद रखना आसान हो रहा है। वहीं बेहतर तैयारी का असर प्रतियोगिताओं में भी दिख रहा है। विद्यालय के विद्यार्थी विकासखंड और जनपद स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं।

शिक्षकों की ओर से बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतियोगिताओं में भागीदारी से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ दूसरों के सामने आत्मविश्वास से प्रस्तुति देने का अवसर मिलता है। इससे विद्यार्थी पढ़ने के साथ एक्टिविटी को लेकर अपनी हिचक दूर कर रहे हैं।

‘मेरी त्रुटियां-मेरी सीख’ में गलती के सुधार पर जोर

बच्चों की कापियों में होने वाली गलतियों को उनकी कमजोरी मानने के बजाय सीखने का अवसर बनाने की कोशिश ‘मेरी त्रुटियां-मेरी सीख’ गतिविधि में दिखाई देती है। शिक्षक बच्चों की कार्यपुस्तिकाओं में हुई गलतियों को समझाकर उन्हें स्वयं सुधारने के लिए प्रेरित करते हैं।

एआरपी अक्षय कुमार के मार्गदर्शन में इस गतिविधि में बच्चे अपनी गलती को छिपाने के बजाय उसे पहचानना और सही करना सीख रहे हैं। इससे उनमें गलत उत्तर देने का डर कम हो रहा है और दोबारा प्रयास करने का आत्मविश्वास बढ़ रहा है।

खेल-खेल में कौशल विकास

स्कूल रेडीनेस फेज-दो कैलेंडर की गतिविधियां छोटे बच्चों के लिए सीखने को सहज बनाने में मददगार साबित हो रही हैं। गतिविधियों के दौरान बच्चे केवल सुनने के बजाय देखकर, बोलकर, करके और आपस में संवाद करते हुए सीखते हैं।

इससे उनकी भाषा, अभिव्यक्ति, समझ और सहभागिता जैसे कौशल को विकसित करने का अवसर मिलता है। कक्षा में गतिविधि आधारित माहौल होने से बच्चे पढ़ाई में अधिक सहजता से जुड़ते हैं।

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