आय से अधिक संपत्ति मामले में भवन निर्माण के कार्यपालक अभियंता पर शिकंजा, पटना समेत तीन ठिकानों पर छापेमारी

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आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बुधवार को पूर्णिया में पदस्थापित भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सत्येंद्र कुमार चौधरी के ठिकानों पर छापेमारी की।

निगरानी की अलग-अलग टीमों ने पटना और पूर्णिया में उनसे जुड़े तीन ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की है। जांच टीम संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों में लेनदेन, निवेश और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है।

टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी की घोषित आय के मुकाबले उनके और उनके परिवार से जुड़े लोगों के नाम पर कितनी चल-अचल संपत्ति है।

पटना और पूर्णिया में एक साथ कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीमों ने बुधवार को पटना के दो और पूर्णिया के एक ठ‍िकाने पर एक साथ कार्रवाई शुरू की।

तलाशी के दौरान जमीन-मकान से संबंधित कागजात, बैंकिंग लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी संपत्तियों के स्वामित्व, उनके निर्माण या खरीद में खर्च हुई रकम और रकम के स्रोत का भी सत्यापन कर रही है। बैंक खातों और निवेश से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

फुलवारी शरीफ का आलीशान मकान भी जांच के घेरे में

बताया जाता है क‍ि पटना के फुलवारी शरीफ में एम्स के पास निकुंज कॉलोनी स्थित सत्येंद्र कुमार चौधरी के मकान की भी निगरानी टीम जांच कर रही है।

स्थानीय स्तर पर इस मकान का नाम ‘स्वास्तिक’ बताए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जाता है कि मकान चौधरी और उनकी पत्नी से जुड़ा है।

इसके अलावा पटना की एजी कॉलोनी स्थित कृषि नगर सी-9 में भी उनका आवास बताया गया है। जानकारी के अनुसार, इस मकान में उनके दो भाई भी अपने परिवार के साथ रहते हैं।

जांच टीम इन संपत्तियों के स्वामित्व और इनके निर्माण में खर्च हुई रकम के स्रोत का सत्यापन कर रही है। परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

आय और संपत्ति का मिलान कर रही निगरानी

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी अधिकारी की वैध आय और जांच अवधि में अर्जित संपत्तियों का मिलान करती है।

इसमें वेतन के साथ अन्य वैध आय, जमीन-मकान, बैंक जमा, निवेश और परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों की जानकारी शामिल होती है।

सत्येंद्र कुमार चौधरी के मामले में भी निगरानी टीम इसी आधार पर उनकी घोषित आय और अर्जित संपत्ति का हिसाब खंगाल रही है।

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