Khagaria Flood Relief Camp School: चारों तरफ बाढ़ का मटमैला उफनता पानी और आशियाना छिन जाने का गहरा दर्द…। इस भीषण आपदा के बीच भी हौसलों की उड़ान किस तरह जिंदा रह सकती है, इसकी मिसाल खगड़िया का एक राहत शिविर पेश कर रहा है। जिला मुख्यालय के वार्ड संख्या-30 और 31 सहित तीन बड़े वार्डों के जलमग्न होने के बाद विस्थापित परिवारों के लिए बापू मध्य विद्यालय बलुआही में राहत शिविर स्थापित किया गया है।
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खगड़िया के बापू मध्य विद्यालय बलुआही स्थित राहत शिविर में बाढ़ पीड़ित बच्चों के लिए शुरू की गई अनूठी अस्थायी पाठशाला
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प्रधानाध्यापक चंद्रमणि मिश्र की पहल पर आधा दर्जन से अधिक शिक्षक नियमित दे रहे सेवा; 60 बच्चों की पढ़ाई जारी
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जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले बच्चों को शिक्षक दे रहे विशेष कोचिंग और मार्गदर्शन
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तनावमुक्त माहौल के लिए अंकित हिमांशु व छोटू सिंह करा रहे नियमित योगाभ्यास; मनोरंजन के लिए बना अलग ‘किड्स जोन’
कैंप प्रभारी चंद्रमणि मिश्र का कहना है कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में बच्चों को मानसिक संबल देना और उनका शैक्षणिक साल बर्बाद होने से बचाना पहली प्राथमिकता है। शिक्षकों के निस्वार्थ और समर्पित भाव से बच्चे रोज पूरी लगन से पढ़ाई कर रहे हैं। इस अस्थायी पाठशाला को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रतिनियुक्त शिक्षक राजीव कुमार, अनुपमलता, सुमन सिन्हा, वीणापाणी, रीता कुमारी प्रसाद, नीरज कुमार और कर्णप्रिया रोजाना तत्परता से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, बच्चों की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए सहायक शिक्षक ब्रजेश झा लगातार मुस्तैद रहते हैं।
नवोदय प्रवेश परीक्षा की विशेष तैयारी, छात्र बोले- घर जैसा माहौल
इस अस्थायी स्कूल की सबसे खास बात यह है कि यहां केवल खानापूर्ति नहीं हो रही, बल्कि बच्चों के भविष्य की नींव भी मजबूत की जा रही है। शिविर में रह रहीं नैना कुमारी, मन्नू कुमारी, दर्पण कुमारी और उज्ज्वल कुमार जैसे कई होनहार बच्चों ने जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा के लिए फॉर्म भरा है। शिक्षकों की टीम इन बच्चों को विशेष मार्गदर्शन, नोट्स और कोचिंग मुहैया करा रही है ताकि प्रतियोगी परीक्षा में वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें। छात्र उज्ज्वल ने उत्साह से बताया कि शिविर में पढ़ाई का माहौल देखकर ऐसा लगता है जैसे मास्टर साहब खुद हमारे घर आकर पढ़ा रहे हों।
योग से तनावमुक्ति और मनोरंजन के लिए ‘किड्स जोन’
बाढ़ के खौफ और विस्थापन के मानसिक आघात से बच्चों को उबारने के लिए समग्र विकास पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए अंकित हिमांशु और छोटू सिंह के नेतृत्व में प्रतिदिन नियमित योगाभ्यास और प्राणायाम कराया जाता है। इसके अलावा नन्हे-मुन्ने बच्चों के खेल-कूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित ‘किड्स जोन’ विकसित किया गया है, जिसकी पूरी देखरेख शिक्षक नीरज कुमार कर रहे हैं। आपदा के अंधेरे में शिक्षा का यह दीप न केवल बच्चों का भविष्य संवार रहा है, बल्कि पूरे समाज को मानवीय संवेदनशीलता का अनूठा संदेश भी दे रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

