अरावली के जंगल और फरीदाबाद के सुनसान खेत एक आतंकी मॉड्यूल की टेस्टिंग का ठिकाना बने थे। NIA की ओर से दाखिल आरोपपत्र के मुताबिक अल-फलाह यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टरों पर आत्मघाती हमले की तैयारी के दौरान जंगलों में IED और हथियारों का परीक्षण किए थे।
खेतों से अरावली जंगल तक पहुंची टेस्टिंग
NIA के अनुसार उमर उन नबी, मुजम्मिल शकील गनई और अदील अहमद राथर ने विस्फोटक मिश्रणों के साथ प्रयोग किए। शुरुआती दौर में समूह ने उर्वरक आधारित मिश्रणों का इस्तेमाल किया और बाद में परीक्षणों में इसकी क्षमता सामने आने के बाद TATP की ओर बढ़ा।
आरोपपत्र के मुताबिक विश्वविद्यालय के पास से ही विस्फोटकों की टेस्टिंग शुरू हुई। सितंबर-अक्टूबर में उमर, गनई और छात्र जसिर बिलाल वानी ने अल-फलाह परिसर में ट्यूबवेल के पास नाइट्रो-ग्लिसरीन का कथित परीक्षण किया। NIA के मुताबिक इसे गनई के फ्लैट में तैयार किया गया था।
इसके बाद तीनों ने विश्वविद्यालय के बाहर एक खेत में टेस्ट ब्लास्ट किया और फिर फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों में धौज के जंगलों तक पहुंचे।
धौज में TATP और हथियारों का परीक्षण
NIA के आरोपपत्र में कहा गया है कि धौज के वन क्षेत्र में उमर और गनई ने TATP के अतिरिक्त परीक्षण किए। इनमें से एक परीक्षण में इस्तेमाल पाइप जैसे उपकरण के अवशेष बाद में बरामद किए जाने का भी दावा किया गया है।
आरोपपत्र के मुताबिक अक्तूबर-नवंबर 2024 में अदील के अल-फलाह आने के दौरान गनई, अदील और अल-फलाह के फार्माकोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर शाहीन अहमद अंसारी ने धौज के एक अन्य वन क्षेत्र में क्रिंकोव राइफल का कथित तौर पर परीक्षण किया।
16 लाख रुपये देने का भी आरोप
NIA ने शाहीन अहमद अंसारी पर अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) के सदस्यों को करीब 16 लाख रुपये देने का भी आरोप लगाया है। NIA के अनुसार यह रकम गनई के जरिये पहुंचाई गई और इसका इस्तेमाल क्रिंकोव राइफल, एक AK-47 और दो पिस्तौल खरीदने में किया गया।
आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि खोरी जमालपुर और धौज में किराये पर लिए गए परिसरों का इस्तेमाल बाद में रसायन, उपकरण और विस्फोटक सार्वजनिक नजरों से दूर रखने के लिए किया गया।
छात्र पर तकनीकी मदद देने का आरोप
काजीगुंड निवासी छात्र जसिर बिलाल वानी पर भी मॉड्यूल की मदद करने का आरोप है। NIA के मुताबिक वह अल-फलाह में बार-बार आता था, विस्फोटक तैयार करने में मदद करता था और कच्चे माल को किराये के परिसरों तक पहुंचाने में सहयोग करता था।
NIA ने आरोप लगाया है कि वानी ने उमर के कमरे में रहते हुए रॉकेट जैसे IED भी तैयार किए। आरोपपत्र के मुताबिक इस तरह समूह ने विस्फोटक तैयार करने से लेकर उनके परीक्षण और सामग्री को अलग-अलग ठिकानों पर रखने तक की तैयारी की।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

