1.29 करोड़ की साइबर ठगी मामले में बड़ा एक्शन, हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद अब ट्रायल की तैयारी

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 आइवीआरआइ के सेवानिवृत्त विज्ञानी शुकदेव नंदी के साथ हुई साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने नौ आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है। आरोपितों का ट्रायल शुरू होने की तैयारी है। सभी आरोपित जेल में बंद हैं और हाई कोर्ट की एकल पीठ ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अब उन्होंने दोहरी पीठ में याचिका दायर की है।

साइबर ठगों ने शुकदेव नंदी को पिछले वर्ष 17 से 20 जून के बीच उनके घर में ही डिजिटल अरेस्ट कर लिया था। ठगों ने खुद को बेंग्लुरु पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें धमकाया।

उन्होंने कहा कि उनके आधार कार्ड से एक सिम खरीदी गई है, जिसका उपयोग ह्यूमन ट्रैफिकिंग और जब फ्रड में किया जा रहा है। इस डर के कारण नंदी ने 1.29 करोड़ रुपये उनके खाते में ट्रांसफर करवा दिए।

जब नंदी को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू की और पाया कि सबसे पहले 1.10 करोड़ रुपये लखनऊ के श्री नारायणी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे।

जांच में स्पष्ट हुआ कि नारायणी इंफ्रा से कुल 125 खातों में पैसे भेजे गए थे। सभी खातों को फ्रीज कर दिया गया। पुलिस ने मुख्य आरोपित प्रदीप कुमार, सुधीर कुमार चौरसिया, महेंद्र प्रताप सिंह, रजनीश द्विवेदी, श्माम कपूर, शुभम यादव, दीपू पांडेय, महफूज और अमान खां को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

दिसंबर में पुलिस ने इन सभी आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की और अब ट्रायल की प्रक्रिया चल रही है। साइबर थाना इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय ने बताया कि आरोपितों को अभी तक जमानत नहीं मिली है।

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