ट्रेन रुकेगी नहीं तो यात्री आएंगे कहां से? गोविंदपुर हाल्ट पर रेलवे के फिजिबिलिटी सर्वे पर उठे सवाल

3.0kViews
1081 Shares

 जब स्टेशन पर ट्रेन रुकेगी ही नहीं और टिकट खिड़की पर ताला लटका रहेगा, तो क्या रेलवे खाली पटरियों और वीरान प्लेटफॉर्म का फिजिबिलिटी सर्वे करेगा? चक्रधरपुर रेल मंडल का ताजा फरमान कुछ ऐसा ही हास्यास्पद है।

गोविंदपुर हाल्ट पर सुबह-शाम की प्रमुख मेमू व पैसेंजर ट्रेनों (टाटा-खड़गपुर 58028, 68016 और खड़गपुर-टाटा 68011, 68015) का ठहराव बंद हुए लंबा वक्त बीत चुका है।

अब जब मामला झारखंड विधानसभा में गूंजा और जनआक्रोश भड़का, तो सीनियर डीसीएम आदित्य कुमार चौधरी ने नया शिगूफा छोड़ दिया कि तीन साल के टिकट बिक्री के डेटा और फिजिकल सर्वे के बाद ही ठहराव पर फैसला होगा।

पहले सुरक्षा, फिर नक्सलवाद और अब कम यात्री

रेलवे अपनी नाकामी छिपाने के लिए लगातार बयान बदल रहा है। ठहराव बंद करने के पीछे पहले सुरक्षा का हवाला दिया गया, फिर ”नक्सली खतरे” की मनगढ़ंत कहानी गढ़ी गई और अब नया राग अलापा जा रहा है कि यहां से यात्री कम चढ़ते हैं।

रेलवे के इस अजब तर्क पर गोविंदपुर निवासी रमेश सिंह तंज कसते हुए कहते हैं कि जब हाल्ट पर ट्रेन रोकेंगे ही नहीं, तो क्या यात्री आसमान से टपकेंगे? बिना ट्रेन रुके टिकट कौन और क्यों खरीदेगा, रेलवे का यह सर्वे केवल जनता की आंखों में धूल झोंकना है।

सलगाझुड़ी स्टेशन के स्थायी रूप से बंद होने के बाद टेल्को, गोविंदपुर, राहरगोड़ा, बारीगोड़ा, सोपोडेरा, गदरा, महतोडीह और नरवा माइंस की एक लाख से अधिक आबादी इसी हाल्ट के भरोसे थी। गोविंदपुर के दैनिक यात्री सुनील महतो का कहना है कि मेमू ट्रेनें नहीं रुकने से हर रोज दोगुना किराया देकर आटो से टाटानगर स्टेशन जाना पड़ रहा है, जिससे गरीब कामगारों और छात्रों की जेब कट रही है।

छोटे हाल्टों पर मेहरबानी, गोविंदपुर से सौतेलापन

टाटा-खड़गपुर रेलखंड पर चिरूगोड़ा, बानसतोला, कानीमहुली और खटकूड़ा जैसे कई छोटे हाल्ट हैं, जहां गोविंदपुर की तुलना में यात्री दबाव काफी कम है, फिर भी वहां पैसेंजर ट्रेनें नियमित रुकती हैं। ऐसे में औद्योगिक शहर के सबसे सघन उपनगरीय इलाके के साथ यह सौतेला व्यवहार रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *