शिमला-मटौर फोरलेन के कच्छियारी-भंगवार हिस्से के आरंभ होते ही ब्रिटिश शासनकाल में बनी 125 वर्ष पुरानी समेला सुरंग इतिहास का हिस्सा बन जाएगी। यह सुरंग कांगड़ा से दौलतपुर-रानीताल-शिमला मार्ग पर दशकों तक आवाजाही की प्रमुख कड़ी रही है। अब यह पुराना संपर्क मार्ग बन जाएगी, जबकि नई ट्विन टनल इसका स्थान लेगी।
इस सुरंग ने 125 वर्ष में भूकंप और आपदाओं के झटके झेले हैं, लेकिन इसकी सेवा निरंतर जारी रही है। आज भी सुरंग से पानी रिसता है, लेकिन इसकी मजबूती पर इसका असर नहीं पड़ा है।
छेनी हथौड़े से बनी थी टनल
मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 79 मीटर लंबी और छह मीटर ऊंची समेला टनल को बनाने में आधुनिक बोरिंग मशीनों का उपयोग नहीं हुआ था। स्थानीय और कु
इसकी ऊंचाई कम होने के कारण बड़े ट्रकों और बसों को सुरंग से पहले रोककर खाली किया जाता है। कई बार सुरंग को चौड़ा करने के प्रयास हुए, लेकिन भौगोलिक स्थिति के कारण सफलता नहीं मिली।
200 करोड़ की 1200 मीटर लंबी ट्विन टनल
फोरलेन शुरू होने पर 200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 1,200 मीटर लंबी आधुनिक समेला ट्विन टनल का उपयोग होगा। यह सुरंग लगभग दो साल पहले तैयार हो चुकी है। फोरलेन शुरू होने के बाद कच्छियारी से रानीताल का सफर पहले के 30 मिनट के बजाय 12 से 15 मिनट में पूरा होगा, जिससे हजारों यात्रियों का समय बचेगा।
सुरंग के छोर पर श्री हनुमान
नई सुरंग आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण है और इसके एक छोर पर श्रीहनुमान की सुंदर नक्काशी की गई है। साथ ही जय श्रीराम भी लिखा गया है। कांगड़ा-शिमला फोरलेन परियोजना के तहत कच्छियारी से भंगवार (रानीताल) बाईपास सेक्शन पर बनी ट्विन सुरंग का निर्माण गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की स्पेशल पर्पज व्हीकल कंपनी गावर कांगड़ा हाईवेज़ प्राइवेट लिमिटेड ने किया है।
कच्छियारी से भंगवार के बीच 18.3 किलोमीटर लंबे फोरलेन कारिडोर की कुल अनुमानित लागत करीब 1,100 करोड़ रुपये है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

