NCL की जमीन पर नई लीज नहीं, फिर भी जारी है पेट्रोल-डीजल की बिक्री; जिम्मेदार जानकार भी अंजान क्यों?
सिंगरौली। निगाही मुख्य मार्ग स्थित भैरव सर्विस स्टेशन को लेकर उठे सवालों के बाद अब मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि जमीन की लीज समाप्त होने के बावजूद पेट्रोल पंप का संचालन जारी है और इसमें HPCL के संबंधित सेल्स मैनेजर की कथित मेहरबानी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वहीं दूसरी ओर NCL के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी पंप संचालक के साथ कथित मिलीभगत कर संचालन जारी रखने का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर भैरव सर्विस स्टेशन संचालित हो रहा है, उसकी पूर्व लीज समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद NCL से नई लीज नहीं मिलने की स्थिति में भी पंप का संचालन बंद नहीं हुआ। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भूमि उपयोग का वैध अधिकार है ही नहीं, तो आखिर पेट्रोल पंप का संचालन किस आधार पर किया जा रहा है? यही नहीं पंप पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री भी जारी है। नियम ये कहता है कि जिस पंप का लीज खत्म हो जाता है उसे समय से पूर्व ही रिन्यू करवाना अनिवार्य होता है अगर ऐसा नहीं होता तो पंप का संचालन सम्बन्धित कंपनी द्वारा बंद कर दिया जाता है। पंप पर संबंधित कंपनी तेल की आपूर्ति रोक देती हैं लेकिन यहां HPCL सेल्स ऑफिसर की मेहरबानी को बदौलत पंप का संचालन किया जा रहा है।

HPCL के सेल्स मैनेजर की भूमिका?
मामले में अब सीधे तौर पर HPCL के संबंधित सेल्स मैनेजर की भूमिका चर्चा में है। आरोप है कि सेल्स मैनेजर की कथित सहमति और मेहरबानी के चलते लीज की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बावजूद पेट्रोल पंप को पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और संचालन जारी रखने में सुविधा मिल रही है। पंप की जमीन की लीज समाप्त हो चुकी है, तो HPCL के रिकॉर्ड में भूमि संबंधी दस्तावेजों की वर्तमान स्थिति क्या है और कंपनी के स्तर पर उसका सत्यापन कब किया गया? जबकि HPCL के सेल्स मैनेजर को लीज की वास्तविक स्थिति की जानकारी पहले से ही है बावजूद इसके सेल्स मैनेजर अंजान बनने की कोशिश कर रहे हैं? यदि जानकारी है तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि जानकारी नहीं है तो कंपनी की दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल क्यों न उठें?
NCL के जिम्मेदार अधिकारी भी अंजान?
दूसरी ओर इस पूरे मामले में NCL के संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। आरोप है कि पंप संचालक को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर अंदरखाने सहयोग किया जा रहा है, जिसके चलते नई लीज के अभाव में भी पेट्रोल पंप का संचालन जारी है। यदि NCL की जमीन पर नई लीज नहीं हुई है, तो यह पता करना जरूरी है कि पंप संचालक को भूमि उपयोग की अनुमति किस अधिकारी ने और किस आधार पर दी?

सवाल जिसके जवाब नहीं:
- क्या NCL ने संचालन रोकने का कोई निर्देश जारी किया?यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
- क्या NCL के रिकॉर्ड में पुरानी लीज अभी भी प्रभावी दिखाई जा रही है?
- और यदि लीज समाप्त हो चुकी है तो कंपनी की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधि जारी रहने का जिम्मेदार कौन है?
‘मेहरबानी’ और ‘मिलीभगत’?
इस पूरे मामले में लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। HPCL के संबंधित सेल्स मैनेजर और NCL के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।
विशेष रूप से यह जांच हो कि—
- भैरव सर्विस स्टेशन की वर्तमान लीज वैध है या समाप्त हो चुकी है?
- NCL ने नई लीज अथवा भूमि उपयोग की अनुमति दी है या नहीं?
- HPCL के पास वर्तमान भूमि संबंधी कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध हैं?
- पेट्रोल पंप को वर्तमान में किस वैध अनुमति के आधार पर संचालित किया जा रहा है?
- लीज समाप्त होने के बाद भी HPCL से पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति किस आधार पर जारी रही?
- संबंधित HPCL सेल्स मैनेजर ने इस संबंध में क्या सत्यापन किया?
- NCL के किस अधिकारी ने पंप संचालन की वर्तमान स्थिति को अनुमति/स्वीकृति दी?
लीज खत्म, नई लीज नहीं… फिर भी पंप चालू! आखिर किसके इशारे पर?
भैरव सर्विस स्टेशन का मामला अब सिर्फ एक पेट्रोल पंप के संचालन का सवाल नहीं रह गया है। यह NCL की जमीन, HPCL की डीलरशिप व्यवस्था और दोनों कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा मामला बनता जा रहा है।
अगले अंक में शेष खबर…

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

