दारा सिंह की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ओडिशा सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम

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चर्चित ग्राहम स्टेंस हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दारा सिंह की रिमिशन (सजा में छूट) याचिका पर निर्णय लेने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा सरकार को कड़ी फटकार लगाई।

शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि यदि राज्य दंड समीक्षा बोर्ड 10 दिनों के भीतर इस मामले में फैसला नहीं करता है, तो संबंधित अधिकारियों को तलब किया जाएगा। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने दारा सिंह की याचिका पर अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब इस मामले में फैसला टाल नहीं सकती।

17 सितंबर को अगली सुनवाई, सचिव को तलब करने की चेतावनी

सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार की ओर से पेश वकील ने निर्णय लेने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। इस पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा, “आप लोग निर्णय लेने से बच नहीं सकते। दो वर्षों से मामले में देरी हो रही है। यदि यही स्थिति रही तो हमें आपके सचिव या वर्तमान जिम्मेदार अधिकारी को तलब करना पड़ेगा।”

गौरतलब है कि 19 अगस्त को भी सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दारा सिंह की रिमिशन याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद पुनः समय मांगे जाने पर अदालत ने असंतोष व्यक्त किया।

राज्य सरकार के वकील ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई से पहले निर्णय लेकर अदालत को अवगत करा दिया जाएगा। साथ ही यह भी बताया गया कि अगली सुनवाई में ओडिशा के एडवोकेट जनरल भी उपस्थित रहेंगे।

ग्राहम स्टेंस हत्याकांड का मामला

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो नाबालिग पुत्रों की हत्या कर दी गई थी। उस समय स्टेंस और उनके दोनों बेटे एक चर्च के बाहर वाहन में सो रहे थे। आरोप है कि उग्र भीड़ ने वाहन में आग लगा दी, जिससे तीनों की मौत हो गई।

इस मामले में निचली अदालत ने वर्ष 2003 में दारा सिंह को मृत्युदंड सुनाया था। बाद में 2005 में ओडिशा हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी बरकरार रखते हुए मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को कायम रखा था।

2022 की शीघ्र रिहाई नीति के तहत मांगी है रिहाई

दो दशक से अधिक समय जेल में बिताने के बाद दारा सिंह ने रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने ओडिशा सरकार की “2022 शीघ्र रिहाई नीति” के तहत रिहाई की मांग की है। हालांकि उनकी रिमिशन याचिका पर पहले ही पांच बार दंड समीक्षा बोर्ड विचार कर चुका है और हर बार आवेदन खारिज किया जा चुका है।

अंतिम बार फरवरी 2024 में उनकी याचिका अस्वीकार कर दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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