जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरद सत्र रहेगा हंगामेदार! 650 सवालों की बौछार और 50 प्रस्ताव, सरकार को घेरने की तैयारी

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा का 21 सितंबर से शुरू होने वाला शरद सत्र इस बार सवालों और प्रस्तावों की बौछार के बीच बेहद व्यस्त रहने वाला है। विधानसभा सचिवालय को अब तक करीब 650 सवाल, 16-17 निजी सदस्य विधेयक और लगभग 50 निजी सदस्य प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इससे साफ है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने सरकार को घेरने और जनहित के मुद्दे उठाने की पूरी तैयारी कर ली है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में प्रदेश कैबिनेट ने चार अगस्त 2026 को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को शरदकालीन सत्र बुलाने की सिफारिश की थी। उपराज्यपाल ने इसके आधार पर 12 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत आदेश जारी कर 21 सितंबर सुबह 10 बजे श्रीनगर में विधानसभा सत्र बुलाया है।आगामी सत्र संवैधानिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। पिछला बजट सत्र चार अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था और संविधान के अनुसार छह महीने के भीतर विधानसभा की बैठक बुलाना अनिवार्य है। ऐसे में चार अक्टूबर की संवैधानिक समयसीमा से पहले ही सदन की बैठक बुलाई जा रही है।

हर विधायक को आठ सवाल पूछने की अनुमति

प्रत्येक विधायक को आठ सवाल, चार तारांकित और चार अतारांकित पूछने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा विधायकों ने निजी सदस्य विधेयक और प्रस्ताव भी जमा किए हैं। करीब 50 प्रस्तावों में से नियमों के तहत जांच के बाद सात का चयन लाटरी से किया जाएगा।

निजी सदस्य विधेयकों के लिए समय की कमी

निजी सदस्य विधेयकों के लिए सदन में सीमित समय होने के कारण इनके पारित होने की संभावना कम रहती है। इसके विपरीत सरकार की ओर से मंत्रियों द्वारा पेश किए जाने वाले विधेयकों के लिए समय की ऐसी बाध्यता नहीं होती, इसलिए उनके पारित होने की संभावना अधिक रहती है।

10-12 दिन चलेगा विधानसभा का सत्र

करीब 10 से 12 दिन चलने वाले इस सत्र में सात से आठ बैठकें होने की संभावना है। इस बार विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ी प्रक्रिया भी डिजिटल होगी। विधायकों से सवाल, विधेयक और संकल्प के नोटिस नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) के माध्यम से आनलाइन लिए गए हैं।

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