जम्मू की हवा कितनी साफ? AQI 140 के करीब, PM10 बढ़ा; सर्दियों में बिगड़ सकते हैं हालात
मैदानी इलाकों के मुकाबले पहाड़ी क्षेत्रों की आबोहवा स्वच्छ मानी जाती है और यहीं कारण है कि मैदानी इलाकों की धूल भरी जिंदगी से राहत पाने के लिए लोग पहाड़ों की ओर रूख करते हैं लेकिन पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूद जम्मू की आबोहवा स्वच्छता के पैमाने से कौसो दूर है। जम्मू शहर में औसतन एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई)140 के आसपास है जिसे संवेदनशील माना जाता है और ऐसी आबोहवा बच्चों-बुजुर्गाें व बीमारों के लिए नुकसानदायक साबित होती है।
कैसे तय होती है शहर की एयर रैंकिंग?
यह रैंकिंग स्थानीय निकायों की स्वयं मूल्यांकन रिपोर्ट और उसके बाद एयर क्वालिटी मानिटरिंग कमेटी, जिसे प्रमुख सचिव के आधार पर किया जाता है, के आधार पर की जाती है। इसमें ठोस कचरा जलाने, सड़कों पर धूल, निर्माण व ध्वस्तीकरण संबंधी कचरा की धूल के अलावा वाहनों से निकलने वाले धुआं और उद्योगों से फैलने वाले प्रदूषण समेत आठ सेक्टर में मूल्यांकन के आधार पर रैंकिंग की जाती है।
निर्माण कार्य व सालिड वेस्ट मैनेजमेंट बना मुख्य कारण
जानकारों की माने तो जम्मू शहर में जारी विभिन्न विकास कार्य वायु में धूल कणों के बढ़ने का मुख्य कारण है। निर्माण कार्यों के दौरान निर्माण सामग्री भी सड़कों पर रहती है जो अक्सर गाड़ियों की आवाजाही से हवा में जाती है और यहीं धूल कण वायु प्रदूषण का मुख्य कारण बनते हैं।
जानकारों का मानना है कि जैसे ही ये मुख्य निर्माण कार्य सम्पन्न होंगे, शहर की रैंकिंग में सुधार होगा क्योंकि पिछले कुछ सालों में जम्मू की रैंकिंग में लगाकर सुधार हो रहा है। दूसरा मुख्य कारण सालिड वेस्ट मैनेजमेंट का है और यह प्रोजेक्ट भी पूरे होने से शहर की रैंकिंग में काफी सुधार होगा।
जम्मू की रैंकिंग में पिछली रैंकिंग के मुकाबले सुधार
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण समिति के वैज्ञानियों के अनुसार जम्मू की रैंकिंग में पिछली रैंकिंग के मुकाबले सुधार हुआ है लेकिन इस बार देखा गया है कि हवा में पीएम 10 की मात्रा बढ़ी है जिससे हमारी रैंकिंग अन्य शहरों की तुलना में नीचे है।
इसका मुख्य कारण एक्सप्रेस-वे का निर्माण जम्मू तक पहुंचना, कुंजवानी-सतवारी फ्लोईओवर निर्माण, भगवती नगर फ्लाईओवर निर्माण और स्मार्ट सिटी के तहत हुए निर्माण कार्य है क्योंकि सबसे अधिक धूल इन्हीं निर्माण कार्यों की वजह से हो रही है। जैसे ही ये निर्माण कार्य खत्म होंगे, जम्मू की रैंकिंग में एकदम उछाल आएगा क्योंकि औद्याेगिक प्रदूषण व वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर काफी हद तक काबू पाया गया है।
सर्दियों में और नाजुक हो सकती है स्थिति
सर्दियों के दिनों में वायु प्रदूषण का स्तर आमतौर पर काफी बढ़ जाता है। धुंध व कोहरे के कारण धूल कण जमीन के निकट आ जाते है जिससे पीएम 10 का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि सर्दियों के दिनों में जम्मू में यह समस्या बढ़ सकती है।
क्या होता है पीएम 10?
पीएम 10 हवा में मौजूद कणों (कणिकीय पदार्थ) का एक प्रकार है, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण सांस के द्वारा फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, क्योंकि इनमें धूल, कालिख, धातु और अन्य हानिकारक रसायन शामिल हो सकते हैं.
पीएम 10 के संपर्क में आने से खांसी, घरघराहट और अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और यह हृदय रोग के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
पीएम 10 के स्रोत
दहन प्रक्रियाएं :
-कोयला, लकड़ी, डीजल और कृषि अपशिष्ट के अधूरे दहन से उत्पन्न कण
वाहन :
-कारों के टायरों के घिसाव से निकलने वाले कण
निर्माण :
-निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल
औद्योगिक व कृषि प्रक्रियाएं
-विभिन्न औद्योगिक और कृषि गतिविधियों से उत्पन्न कण
स्वास्थ्य पर प्रभाव:
-यह खांसी, घरघराहट और सांस लेने में कठिनाई का कारण बन सकता है।
-अस्थमा या तीव्र ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों के लिए स्थिति बिगड़ सकती है।
-बेंजोपाइरीन जैसे कैंसरकारी पदार्थ भी पीएम 10 में पाए जा सकते हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

