सरहद पर देश की रक्षा में अपनी पूरी जवानी समर्पित करने वाले पूर्व सैनिक को अब बुढ़ापे में अपने ही गांव की एक अदद सड़क के लिए सिस्टम के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मामला विकास खंड द्रंग की ग्राम पंचायत सिलग के वार्ड चैहड स्थित लाहन गांव का है।
अनुसूचित जाति बहुल इस गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए 76 वर्षीय पूर्व सीआरपीएफ जवान बीरी सिंह बीते कई सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हासिल केवल आश्वासन हुआ है।
अब निराश होकर बीरी सिंह ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने लोकपाल को भी शिकायत सौंपी है।
बजट पास हुआ लेकिन नहीं बनी सड़क
बीरी सिंह का आरोप है कि लाहन गांव के लिए विभिन्न मदों से रास्ता व सड़क निर्माण के लिए 8.77 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों ने सड़क लाहन गांव में बनाने के बजाय कहीं और बना दी और कागजों में बिल भी जारी करवा लिए।
सड़क के अभाव में एंबुलेंस भी नहीं जा सकती गांव
पूर्व सैनिक ने बताया कि गांव में सात परिवार रहते हैं, लेकिन पक्की सड़क न होने से एंबुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती। लोक निर्माण विभाग के पास मौजूद बजट का भी उपयोग नहीं किया गया।
पंचायत प्रधान ने खारिज किए बीरी सिंह के आरोप
दूसरी ओर पूर्व पंचायत प्रधान पन्या देवी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बीरी सिंह को सड़क की सुविधा मिली हुई है। उनकी पुरानी शिकायतें भी जांच में गलत पाई गई थीं।
मेरे पास शिकायत आई थी और मैंने स्वयं लाहन गांव का दौरा किया है। धरातल पर सड़क बंद है। मामले में कनिष्ठ अभियंता से रिपोर्ट तलब की गई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

