मंडी के औने-पौने दाम और बिचौलियों के खेल से मुक्ति! बिहार में सरकारी दर पर बिकेगी हरी सब्जी, मिलेगा नकद भुगतान
Munger Vegetable MSP Scheme: खेतों में कड़ी धूप और पसीना बहाकर हरी सब्जियां उगाने वाले अन्नदाताओं को अब अपनी उपज बिचौलियों और आढ़तियों के हाथों औने-पौने दाम पर बेचने की लाचारी से हमेशा के लिए मुक्ति मिलने जा रही है। जिले में अब पैक्स की तर्ज पर सहकारी समितियां किसानों से सीधे सरकारी दर पर ताजी हरी सब्जियों की खरीद करेंगी।
इस संकट के स्थायी समाधान के लिए जिले के पांच प्रमुख सब्जी उत्पादक प्रखंडों— हवेली खड़गपुर, असरगंज, तारापुर, संग्रामपुर और टेटिया बंबर में संचालित प्राथमिक वेजीटेबल को-ऑपरेटिव सोसाइटी (पीवीसीएस) को खरीद की कमान सौंपी जा रही है। इन पांचों प्रखंडों में तीन-तीन यानी कुल 15 आधुनिक सब्जी संग्रहण केंद्र (कलेक्शन सेंटर) स्थापित किए जाएंगे, जहां किसान अपनी उपज सीधे पहुंचा सकेंगे।
हाथों-हाथ भुगतान, जेल-अस्पताल और मिड-डे मील में होगी आपूर्ति
संग्रहण केंद्रों पर सब्जियां तौलते ही किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित दर पर मौके पर ही नकद या सीधे बैंक खाते में भुगतान की सुविधा दी जाएगी। समितियों द्वारा खरीदी गई इन ताजी सब्जियों की सीधी आपूर्ति सरकारी अस्पतालों के मरीजों, मंडल कारा (जेल) के बंदियों और विद्यालयों में संचालित प्रधानमंत्री पोषण योजना (मध्याह्न भोजन) में की जाएगी।
इसके अतिरिक्त अधिशेष सब्जियों को स्थानीय थोक व खुदरा बाजारों में समितियों के नेटवर्क के जरिए बेचा जाएगा। इससे समितियों को लाभांश के रूप में आय होगी और स्थानीय उपभोक्ताओं को भी नियंत्रित दर पर ताजी सब्जियां मिल सकेंगी। हालांकि, शासन स्तर पर खरीद की दरें अभी तय नहीं हुई हैं, जिसे इस माह के अंत तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
तारापुर में जमीन उपलब्ध, मुंगेर-जमुई को-ऑपरेटिव बैंक देगा फंड
जिला सहकारिता पदाधिकारी मीनू कुमारी के अनुसार, विभाग की ओर से इसी माह के अंत तक विभिन्न सब्जियों के सरकारी खरीद मूल्य की सूची जिला मुख्यालय को भेज दी जाएगी। प्राथमिक वेजीटेबल को-ऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्षों की देखरेख में खरीद प्रक्रिया संचालित होगी।
पूरी प्रक्रिया में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुंगेर-जमुई को-ऑपरेटिव बैंक के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (सीईओ) को मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है, जबकि सहकारिता बैंक ही सोसायटियों को खरीद के लिए पर्याप्त कार्यशील पूंजी (फंड) मुहैया कराएगा।
संग्रहण केंद्र निर्माण के लिए प्रत्येक स्थान पर 1000 वर्ग फीट जमीन की दरकार है, जिसके लिए संबंधित अंचलाधिकारियों से पत्राचार किया गया है। तारापुर प्रखंड में आवश्यक जमीन चिह्नित कर उपलब्ध करा दी गई है, जहां ले-आउट पूरा होते ही विभाग द्वारा आधारभूत संरचना तैयार कराई जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर कार्यालय निर्माण के लिए विभाग से प्राप्त ₹98,800 की राशि संबंधित पीवीसीएस को स्थानांतरित कर दी गई है।
किसानों की जुबानी
-
“सहकारी समितियों द्वारा सरकारी मूल्य पर सब्जी की सीधी खरीद होने से हमें वाजिब मुनाफा मिलेगा। रोज-रोज मंडी ले जाकर औने-पौने दाम में बेचने की झंझट और भाड़े के खर्च से मुक्ति मिल जाएगी।”
— मुकेश कुमार, सब्जी उत्पादक किसान, हेमजापुर।
-
“रोजाना भोर में टोकरी लादकर मंडी जाना पड़ता है, जहां आढ़ती अपनी मनमर्जी से भाव तय करते हैं। यदि गांव के समीप ही संग्रहण केंद्र पर खरीद शुरू होती है, तो समय की बचत होगी और तुरंत तय पैसा मिल जाएगा।”
सहकारिता विभाग आगामी अक्टूबर माह से इस महत्वाकांक्षी व्यवस्था को धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर चुका है। इस व्यवस्था के लागू होते ही मंडियों में मनमाने भाव तय करने वाले बिचौलियों के सिंडिकेट पर प्रभावी लगाम लगेगी और उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब मूल्य सुनिश्चित होगा।
-
मुंगेर के 5 प्रखंडों में प्राथमिक वेजीटेबल को-ऑपरेटिव सोसाइटी (PVCS) के जरिए अक्टूबर से शुरू होगी सब्जियों की सरकारी खरीद
-
हवेली खड़गपुर, असरगंज, तारापुर, संग्रामपुर और टेटिया बंबर में 3-3 यानी कुल 15 आधुनिक सब्जी संग्रहण केंद्र होंगे स्थापित
-
किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित दर पर मिलेगा हाथों-हाथ भुगतान; अस्पताल, जेल और मिड-डे मील में होगी सब्जियों की सीधी सप्लाई
-
तारापुर में संग्रहण केंद्र के लिए 1000 वर्ग फीट जमीन उपलब्ध; सहकारिता बैंक उपलब्ध कराएगा खरीद का फंड
आंकड़ों के मुताबिक, मुंगेर जिले में लगभग 2500 हेक्टेयर के बड़े रकबे में सालाना दो लाख पचास हजार क्विंटल हरी सब्जियों की बंपर पैदावार होती है। वर्तमान में पारदर्शी बाजार और सरकारी खरीद व्यवस्था न होने के कारण आवक बढ़ते ही कीमतें औंधे मुंह गिर जाती हैं, जिससे कई बार किसानों को लागत से भी कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

