उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियां अब सीटवार रणनीति की ओर बढ़ रही हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन नौ और 10 सितंबर को कुमाऊं के दौरे पर रहेंगे।
हल्द्वानी में प्रदेश कार्यसमिति और कोर कमेटी की बैठक के बीच उनके प्रवास को चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरान कुमाऊं की कमजोर, हारी और कम अंतर से जीती सीटों को लेकर संगठन से फीडबैक लिया जाएगा।
127 और 182 वोट की हार सबसे बड़ी चुनौती
अल्मोड़ा और द्वाराहाट भाजपा के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2022 में अल्मोड़ा में भाजपा महज 127 वोट और द्वाराहाट में 182 वोट से चुनाव हारी थी। दोनों सीटों पर मामूली अंतर से मिली हार ने भाजपा के लिए वापसी की संभावना भी छोड़ी है। ऐसे में इन सीटों पर बूथवार कमजोरियों के साथ स्थानीय समीकरण और प्रत्याशी की स्वीकार्यता पर मंथन होगा।
धारचूला और बाजपुर में भी भाजपा को उम्मीद
धारचूला में भाजपा की हार का अंतर करीब 1100 और बाजपुर में करीब 1600 वोट रहा था। वहीं हल्द्वानी, किच्छा और नानकमत्ता में पिछली हार का अंतर अपेक्षाकृत अधिक रहा। लिहाजा पार्टी इन सीटों के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में अलग रणनीति बनाएगी।
कम अंतर वाली जीत भी भाजपा की चिंता
भाजपा की नजर सिर्फ हारी सीटों पर नहीं है। वर्ष 2022 में कम अंतर से जीती सीटों को बचाना भी पार्टी के लिए चुनौती है। गदरपुर में भाजपा के अरविंद पांडे 1120 वोट से जीते थे। उन्हें 52,841 जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 51,721 वोट मिले थे।
रानीखेत, डीडीहाट, सल्ट और कपकोट में भी जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं रहा। ऐसे में भाजपा के सामने दोहरा लक्ष्य है, हारी सीटों पर वापसी और कम अंतर से जीती सीटों पर बढ़त मजबूत करना।
कुमाऊं में अल्मोड़ा, द्वाराहाट, धारचूला, बाजपुर, गदरपुर, रानीखेत, डीडीहाट, सल्ट, कपकोट, हल्द्वानी, किच्छा और नानकमत्ता जैसी सीटों पर भाजपा की विशेष नजर है। इन सीटों पर चुनाव के लिए माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति बनाई जाएगी

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

