पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर मालखाने में रखे, पंचकूला कोर्ट ने दिया अमेजन को सौंपने का आदेश

1964 Shares

 पुलिस मालखाने में जब्त मोबाइल फोन को मुकदमे के दौरान अनिश्चितकाल तक रखने का कोई औचित्य नहीं है। मुकदमे के निपटारे में लंबा समय लग सकता है और ऐसे में कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इसी आधार पर सेशंस कोर्ट ने अमेजन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए बरामद मोबाइल फोन कंपनी को सौंपने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने निर्धारित शर्तें पूरी करने के बाद कंपनी को इन मोबाइल फोन को बेचने की भी अनुमति दे दी है। मामले में अमेजन ने छह दिसंबर 2022 को निचली अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी।

लोअर कोर्ट ने कंपनी के आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कुछ मोबाइल फोन सुपरदारी पर देने के आदेश दिए थे, लेकिन कंपनी को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक इन्हें बेचने या इनके स्वरूप में बदलाव करने से रोक दिया था। कंपनी ने इन शर्तों को चुनौती दी थी।

कंपनी ने कहा, माल लंबे समय तक पड़ा रहा तो होगा नुकसान

कंपनी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जब्त किए गए मोबाइल उसके स्वामित्व के हैं और कंपनी को पहले ही अपराध के कारण भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है। यदि बरामद सामान को बेचने की अनुमति नहीं दी गई तो उसे और नुकसान उठाना पड़ेगा।

कंपनी ने यह भी कहा कि वर्तमान में कार्यरत कर्मचारी भविष्य में कंपनी के साथ नहीं रह सकते और ऐसे में उनसे जमानतदार बनने की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। अधिकृत प्रतिनिधि ने मोबाइल फोन कंपनी के होने का शपथपत्र भी दिया था।

पुलिस को भी मोबाइल देने पर आपत्ति नहीं थी

अदालत ने रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि जब्त सामान कंपनी का है और पुलिस की छह दिसंबर 2022 की रिपोर्ट में भी इन वस्तुओं को कंपनी को देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी। कोर्ट ने कहा कि मुकदमे के पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में मोबाइल फोन को पुलिस मालखाने में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

फोटो, वीडियो और इन्वेंटरी तैयार करने के बाद बिक्री की अनुमति

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि बरामद वस्तुओं को लंबे समय तक मालखाने में रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित थाना प्रभारी शिकायतकर्ता की मौजूदगी में मोबाइल फोन की फोटो खींचेगा, प्रत्येक वस्तु और उसकी इनवॉयस का विस्तृत इन्वेंटरी तैयार करेगा औक उसकी वीडियोग्राफी भी कराएगा।

यह इन्वेंटरी पुलिस रिपोर्ट के साथ संबंधित अदालत में पेश की जाएगी। इसके बाद कंपनी को एक लाख रुपये का इंडेम्निटी बांड जमा करना होगा। इन सभी शर्तों की पूर्ति होने पर कंपनी को संबंधित मोबाइल फोन बेचने की अनुमति होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश में मामले के मूल आरोपों या मेरिट पर कोई राय व्यक्त नहीं की गई है।

इन मोबाइल फोन को लेकर था विवाद

निचली अदालत के आदेश में जिन मोबाइल फोन का उल्लेख था, उनमें OnePlus 10 Pro 5G (Volcanic Black), Redmi K50i 5G (Phantom/Black), Redmi Note 11 Pro 5G (Mirage Blue) और Redmi Note 10 Pro (Dark Night) शामिल थे।

इनमें से पुलिस रिपोर्ट के आधार पर OnePlus 10 Pro 5G, Redmi Note 11 Pro 5G और Redmi Note 10 Pro को सुपरदारी पर देने का आदेश पहले ही दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *