Toll प्लाजा पर फर्जीवाड़ा, बिना FASTag वाली गाड़ियों से अवैध एप से टोल वसूली
देशभर में करीब 100 नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर बिना फास्टैग वाले वाहनों से दो अवैध एप के जरिये गैरकानूनी तरीके से टोल वसूली का बड़ा मामला सामने आया है। ईडी ने गुरुवार को दावा किया कि ‘माबडाटा’ और ‘एनी’ नाम के एप से करोड़ों रुपये की अवैध टोल वसूली की गई।
छापेमारी के दौरान लगभग 1.03 करोड़ रुपये नकद, खाता-बही, बैंक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। साथ ही आठ बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया।
ईडी ने कहा कि जिन गाड़ियों पर फास्टैग स्टिकर नहीं थे, उनसे टोल वसूलने में आसानी के लिए ‘माबडाटा’ और ‘एनी’ नाम के अवैध एप बनाए गए थे। इस तरह की गैर-कानूनी टोल वसूली पर नजर रखने के लिए पोर्टल भी चलाए जा रहे थे।
यह तरीका लगभग 100 टोल प्लाजा पर इस्तेमाल किया गया था। डिजिटल रिकार्ड से करोड़ों रुपये की अनधिकृत टोल रसीदें मिली हैं।
एप का इस्तेमाल करके नकली रसीदें बनाई
ईडी ने मामले की जांच के लिए मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत आपराधिक केस दर्ज किया है। यह कदम उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर पुलिस द्वारा जनवरी 2025 में दर्ज एफआईआर का संज्ञान लेने के बाद उठाया गया है।
यह एफआइआर ‘अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा’ और देशभर के कुछ अन्य टोल प्लाजा पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोपों के संबंध में दर्ज की गई थी।
पुलिस की शिकायत में कहा गया है कि ‘गैर-कानूनी’ एप का इस्तेमाल करके नकली रसीदें बनाई गईं और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के आधिकारिक सिस्टम से वसूली की जानकारी छिपाई गई।
इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ। ईडी की जांच से पता चला है कि अवैध एप से वसूली में बिचौलियों और एनएचएआइ द्वारा टोल संग्रह के लिए नियुक्त कंपनियों की भूमिका है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

