नेपाल के भोटेकोशी क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट सहित आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। जलप्रलय में बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए थे। हादसे के बाद से नेपाल के सुरक्षाकर्मियों और स्वयंसेवी संगठनों की ओर से लापता लोगों की तलाश जारी है।
लंबे समय तक खोजबीन के बाद भी जिन लापता लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, उनके स्वजन अब उनके जीवित होने की उम्मीद खोने लगे हैं। ऐसे परिवार हिंदू परंपरा के अनुसार कुश से प्रतीकात्मक शव तैयार कर अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
इससे बाढ़ की त्रासदी के बाद लापता लोगों के परिवारों की पीड़ा और भावनात्मक संघर्ष का मार्मिक दृश्य सामने आ रहा है।
बुधवार को नुवाकोट निवासी बबीन रिजाल अपने माता-पिता के प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार के लिए पशुपतिनाथ स्थित आर्यघाट पहुंचे। उन्होंने बताया कि भोटेकोशी की बाढ़ की चपेट में आने के बाद उनकी माता विनीता रिजाल और पिता नाथ रिजाल लापता हो गए थे।
घटना के बाद उन्होंने काफी खोजबीन की। नदी किनारे से लेकर विभिन्न स्थानों और अस्पतालों तक अपने माता-पिता की तलाश की गई, लेकिन बाढ़ के काफी समय बीत जाने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल सका।
बबीन ने बताया कि लंबे समय तक माता-पिता की कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण अब उनके जीवित होने की उम्मीद समाप्त हो गई है। इसी कारण हिंदू परंपरा के अनुसार, दोनों का कुश से प्रतीकात्मक शव तैयार कर अंतिम संस्कार करना पड़ा।
आर्यघाट पर माता-पिता के प्रतीकात्मक शवों की अंत्येष्टि के दौरान बबीन भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के माध्यम से उन्होंने अपने माता-पिता को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।
भोटेकोशी की बाढ़ में अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए यह प्रक्रिया केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लंबे इंतजार, अनिश्चितता और अपनों के लौटने की उम्मीद टूटने के बाद उपजी पीड़ा का प्रतीक बन गई है। लापता लोगों के स्वजन आज भी नदी किनारे और अस्पतालों में उनकी तलाश में जुटे हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

