नई दिल्ली: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर महादेव का अभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष हलाहल को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण कर लिया था। विष के प्रभाव से उनके शरीर में तीव्र उष्णता उत्पन्न हुई, जिसे शांत करने के लिए देवी-देवताओं और भक्तों ने उन पर लगातार जल अर्पित किया। इसी घटना को सावन में जलाभिषेक की परंपरा का प्रमुख आधार माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल चढ़ाने, ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने और विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, जलाभिषेक केवल एक पूजा-विधि नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। सावन में भगवान शिव की आराधना के साथ संयम, सेवा, दान और सदाचार का पालन करने का भी विशेष महत्व माना गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

