बड़े जलभराव हॉटस्पॉट पर दिखा असर, अब पूरी दिल्ली को स्थायी समाधान का इंतजार

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राजधानी दिल्ली में इस मानसून के दौरान जलभराव के कुछ प्रमुख हॉटस्पॉट पर पहले की तुलना में राहत देखने को मिली है।

दिल्ली सरकार द्वारा मानसून से पहले नालों की सफाई, पंपिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने, संवेदनशील स्थानों की निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसे कदमों का असर कुछ प्रमुख स्थानों पर दिखाई दिया है। हालांकि, शहर के कई अन्य हिस्सों में तेज वर्षा के दौरान अब भी जलभराव की समस्या बनी हुई है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जलभराव के प्रमुख हॉटस्पॉट

दिल्ली में मिंटो ब्रिज, आईटीओ, जखीरा अंडरपास, पुल प्रहलादपुर अंडरपास, आजादपुर, नरेला, मुंडका, नजफगढ़, बदरपुर, रोहतक रोड, रिंग रोड के कई हिस्से, द्वारका, पालम, लाजपत नगर, तिलक नगर, मायापुरी, विकास मार्ग, शालीमार बाग और करोल बाग जैसे इलाके लंबे समय से जलभराव के प्रमुख हॉटस्पॉट माने जाते रहे हैं।

इनमें से कुछ स्थानों पर इस बार हालात अपेक्षाकृत बेहतर रहे, लेकिन कई इलाकों में भारी वर्षा के दौरान सड़कें पानी में डूब गईं और यातायात प्रभावित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चिन्हित हॉटस्पॉट पर सुधार पर्याप्त नहीं होगा।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण, पुराने ड्रेनेज नेटवर्क और कई स्थानों पर अतिक्रमण के कारण पूरे शहर के जल निकासी तंत्र को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत व्यापक सुधार कार्य किए जाने की जरूरत है।

सरकार का लक्ष्य केवल मानसून के दौरान राहत देना नहीं, बल्कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान विकसित करना है। यदि ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत प्रीकास्ट तकनीक और अन्य सुधार कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से पूरे शहर में लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल, राजधानी के लोगों की नजर इस बात पर है कि हॉटस्पॉट पर मिली शुरुआती राहत कब पूरे शहर तक पहुंचती है।

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