अमेरिका में आंध्र प्रदेश की महिला का डिपोर्टेशन केस खारिज, फिर भी ICE ने हिरासत में लिया
अमेरिका में आंध्र प्रदेश की वेंकटा नरसामंबा वासमसेट्टी ने लगभग तीन दशकों तक एक टीचर, मां और दादी के तौर पर अपनी जिंदगी बिताई लेकिन अभी वह इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) की हिरासत में हैं।
हालांकि, मई में एक जज ने उनके इमिग्रेशन केस को खत्म कर दिया था, जिससे वह कानूनी तौर पर स्थायी निवासी बन गईं लेकिन 11 अगस्त को उन्हें आईसीई की हिरासत में ले लिया गया और जॉर्जिया के एक डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। इससे उनके परिवार के मन में यह सवाल उठने लगा कि जब जज ने उन्हें देश से बाहर भेजने की कार्यवाही को खारिज कर दिया था तो उन्हें हिरासत में कैसे लिया जा सकता है।
अमेरिका पहुंचने पर शुरू हुई परेशानी
जब वह वापस अमेरिका लौटीं तो डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) ने उन पर आरोप लगाया कि लंबे समय तक देश से बाहर रहने के कारण उन्होंने अपनी स्थायी निवासी की स्थिति खो दी है। केस चलने के दौरान उन्हें घर पर रहने की इजाजत दी गई, बशर्ते वह शार्लेट में नियमित रूप से आईसीई के सामने हाजिर हों। नरसामंबा ने हर अपॉइंटमेंट का पालन किया।
उनके वकील ने कई दस्तावेज पेश किए जिनसे पता चलता था कि उनका कभी भी अमेरिका में अपना घर, परिवार, नौकरी या स्थायी निवासी की स्थिति छोड़ने का इरादा नहीं था। जब डीएचएस अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोर्ट की समय-सीमा का पालन नहीं कर पाया तो आखिरकार यह केस खत्म हो गया।
19 मई को जज ने पाया कि सरकार ऐसा कोई साफ और ठोस सबूत नहीं दे पाई जिससे साबित हो सके कि नरसामंबा को आरोपों के आधार पर देश से निकाला जा सकता है। इसलिए, जज ने उन्हें देश से निकालने की कार्यवाही को खत्म कर दिया और वह कानूनी तौर पर स्थायी निवासी बनी रहीं।
हालांकि, आईसीई के पास चेक-इन की प्रक्रिया जारी रही। 11 जुलाई को वह जज के आदेश की कॉपी लेकर तय ईआरओ चेक-इन के लिए पहुंचीं। उन्हें यह बताने के बजाय कि अब उन्हें रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं है, उनसे अगले महीने वापस आने को कहा गया क्योंकि आईसीई के रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुए थे और उस दिन उनके वकील उपलब्ध नहीं थे।
11 अगस्त को वह अपनी बेटी के साथ शार्लेट आईसीई ऑफिस गईं लेकिन वह बाहर नहीं आईं। उनके परिवार के अनुसार, उन्हें हिरासत में ले लिया गया और ओसिला, जॉर्जिया में इरविन काउंटी डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। इस सेंटर पर पहले भी वहां की स्थितियों और कथित दुर्व्यवहार को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
क्यों है चिंता की बात?
उनकी हिरासत इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि बताया जाता है कि नरसामंबा को गंभीर इंसुलिन-निर्भर डायबिटीज है और उन्हें रोजाना दवा और कड़ी मेडिकल निगरानी की जरूरत होती है। उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें सही देखभाल नहीं मिली और उनकी स्थिति के हिसाब से उचित खाना भी नहीं दिया गया। उन्होंने मदद के लिए अमेरिका में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है।
उन्होंने आईसीई से उन्हें रिहा करने और उनके देश से निकाले जाने के मामले को खत्म करने वाले इमिग्रेशन जज के आदेश का सम्मान करने की भी अपील की है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

