जगन्नाथ को विश्वनाथ से जोड़ना है, काशी-ओडिशा के रिश्ते को नई ऊंचाई देने पर जोर

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लालपुर स्थित ट्रेड फैसिलिटी सेंटर में चल रहे ओडिशा पर्व में रविवार को पहुंचीं ओडिशा की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री प्रवति परिदा ने काशी और ओडिशा के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयोजन के पीछे मूल भावना जगन्नाथ को विश्वनाथ से जोड़ने की है।

काशी और पुरी दोनों की अपनी विशिष्ट पहचान है और दोनों के बीच आस्था के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव भी रहा है। इसी जुड़ाव को आगे बढ़ाते हुए ओडिशा की कला, संस्कृति, परंपरा और पर्यटन को काशी के माध्यम से देश के सामने लाने का प्रयास है। प्रेस कांफ्रेंस में उत्तर प्रदेश के श्रम एवं रोजगार मंत्री अनिल राजभर भी मौजूद रहे।

ओडिशा की उपमुख्यमंत्री ने पर्यटन को दोनों राज्यों के बीच संपर्क बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि काशी आने वाले लोगों को ओडिशा के पर्यटन स्थलों से जोड़ने और ओडिशा आने वाले पर्यटकों को काशी से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए हवाई और रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। काशी से सीधे ओडिशा के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के लिए विशेष ट्रेनों की संभावनाओं पर भी संबंधित स्तर पर पहल की जाएगी।

नमो घाट से सीखकर ओडिशा में विकसित होंगे घाट
प्रवति परिदा ने वाराणसी के नमो घाट को लेकर विशेष उत्सुकता जताई। वह नमो घाट का भ्रमण कर वहां नदी, पर्यटन और सार्वजनिक सुविधाओं को एक साथ विकसित करने के मॉडल को समझेंगी। इसके आधार पर ओडिशा में महानदी सहित प्रमुख नदियों के किनारे इसी तरह के सुविधायुक्त पर्यटन केंद्र विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इससे नदी पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

2036 के लक्ष्य से 2047 तक पर्यटन को नई पहचान
ओडिशा पर्यटन को वर्ष 2036 और उसके आगे 2047 तक वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। राज्य का लक्ष्य एशिया के प्रमुख पर्यावरणीय और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में शामिल होना है। पर्यटन के माध्यम से 25 लाख से अधिक आजीविका के अवसर सृजित करने और 15 बड़े पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय स्वरूप देने पर जोर है। पर्यटन को केवल भ्रमण नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

पर्यटक आएगा तो कई लोगों को मिलेगा रोजगार
परिदा ने पर्यटन के आर्थिक प्रभाव को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक एक पर्यटक का आगमन केवल होटल या परिवहन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके साथ स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प, परिवहन, गाइड, छोटे कारोबार और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बनते हैं। इसी सोच के साथ ओडिशा में पर्यटन को स्थानीय आजीविका का मजबूत आधार बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मंदिर पर्यटन में काशी का प्रबंधन मॉडल अपनाएगा ओडिशा
उपमुख्यमंत्री प्रवति परिदा ने मंदिर पर्यटन और भीड़ प्रबंधन को लेकर काशी के अनुभवों को ओडिशा में लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वाराणसी में श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने और मंदिर पर्यटन को सुचारु बनाने के लिए अपनाए जा रहे प्रबंधन मॉडल का अध्ययन किया जाएगा। इसे जगन्नाथ मंदिर सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर लागू करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। जगन्नाथ मंदिर में पंडों से जुड़ी श्रद्धालुओं की शिकायतों को दूर करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने पर जोर रहेगा।

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