मुफ्त बिजली बनी सियासी चुनौती, जम्मू-कश्मीर में 200 यूनिट छूट की जगह बढ़ा टैरिफ

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जम्मू-कश्मीर में नेशनल कान्फ्रेंस सरकार का सबसे बड़ा चुनावी वादा अब उसी के लिए सबसे बड़ी फांस बन गया है। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे के साथ सत्ता में आई नेकां सरकार दो साल बाद भी वह वादा पूरा नहीं कर पाई है। इस मुद्दे पर सरकार को बड़ा झटका विपक्ष से नहीं, बल्कि अपने ही घर से लगा है।

सबसे तीखा हमला सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस के भीतर से ही हुआ है। सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने कहा कि पार्टी ने चुनाव में 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया था, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी वह पूरा नहीं हुआ।रुहुल्ला ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के 100 प्रतिशत मीटरिंग वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वह मीटरिंग की मंशा समझते हैं, लेकिन सरकार को टैरिफ बढ़ाने के बजाय मुफ्त बिजली का वादा पूरा करने पर जवाब देना चाहिए।

मुफ्त में 200 यूनिट देने के बजाय लगभग सात प्रतिशत बढ़ोतरी की जा रही है। उनकी जवाबदेही जनता के प्रति है, किसी पार्टी के प्रति नहीं। पार्टी नेतृत्व पर ‘अहंकार’ का आरोप लगाते हुए रुहुल्ला ने चेतावनी दी कि यह रवैया नेकां को नुकसान पहुंचा सकता है।

जनता के साथ धोखा

पीपुल्स कान्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को बिजली के लिए अब अपनी जेब से ज्यादा पैसे देने होंगे। हद तो यह है कि जेईआरसी बिजली दरों में 6.83 प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी देते हुए कह रहा है कि सरकार ने जनता को टैरिफ शाक से बचाया है।

यह निश्चित रूप से उन लोगों के लिए झटका है जिनसे 2024 में सत्ताधारी दल ने 200 यूनिट मुफ्त का वादा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग दो साल में एक रुपये का भी लाभ नहीं मिला, उल्टा बिना मीटर वाले इलाकों में लोड बढ़ाकर बिल बढ़ा दिया गया।

महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही

पीडीपी नेता वहीद उर रहमान पारा ने भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने भी एक्स पर लिखा कि जब बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही है, तब सरकार ने 6.83 प्रतिशत बिजली टैरिफ बढ़ा दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि सत्ताधारी दल ने मुफ्त बिजली, मुफ्त गैस और मुफ्त राशन का वादा किया था।

जेकेपीसी महासचिव और आल जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलवी इमरान रजा अंसारी ने भी तंज कसते हुए कहा कि नेकां ने 200 मुफ्त यूनिट का सपना बेचा। लोगों ने भरोसा किया। अब टैरिफ 6.83 प्रतिशत बढ़ने वाला है। विडंबना खुद अपनी कहानी लिख रही है: वादा मुफ्त बिजली का था, हकीकत बड़ा बिल है।’

कारोबारियों में भी गुस्सा, बोले- अर्थव्यवस्था पहले से मंदी में

कश्मीर ट्रेड अलायंस (केटीए) ने भी इस बढ़ोतरी का कड़ा विरोध किया है। केटीए अध्यक्ष एजाज शाहदर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे में बिजली महंगी होने से व्यापार करने की लागत बढ़ेगी।

कई इलाकों में अभी भी बिजली कटौती और अविश्वसनीय सप्लाई की समस्या है, ऐसे में दाम बढ़ाना उचित नहीं है। कुल मिलाकर, 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा अब सरकार के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है, और 6.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने उस वादे पर विपक्ष को हमला करने का खुला मौका दे दिया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने कहा कि महंगाई से परेशान लोगों पर इससे अधिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि बिजली किराए में वृद्धि नहीं की जानी चाहिए। कई लोगों की बिजली काटी जा रही है। ऐमिनेस्टी योजना का लाभ लोगों का मिलना चाहिए।

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