सिर्फ यौन इच्छा नहीं, कई मनो-सामाजिक कारकों से जुड़े हैं यौन अपराध; AIIMS स्टडी में अहम खुलासा

1027 Shares

सिर्फ यौन इच्छा नहीं, कई मनो-सामाजिक कारकों से जुड़े हैं यौन अपराध; AIIMS स्टडी में सामने आई अहम बातें

यौन अपराधों को केवल यौन इच्छा के नजरिए से समझना पर्याप्त नहीं है। AIIMS से जुड़े शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में दुष्कर्म के आरोपियों से जुड़े कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों का विश्लेषण किया गया। शोध में आक्रामकता, सहानुभूति, बचपन के प्रतिकूल अनुभव और मनोविकृति जैसे पहलुओं को समझने की कोशिश की गई।

यौन अपराधों के पीछे कई कारकों की भूमिका

AIIMS के शोधकर्ताओं ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि यौन अपराधों के पीछे मौजूद मनो-सामाजिक परिस्थितियों को समझना रोकथाम और हस्तक्षेप की रणनीति तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण है। अध्ययन का उद्देश्य किसी एक कारण को सभी मामलों पर लागू करना नहीं था, बल्कि आरोपियों में मौजूद विभिन्न मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों का अध्ययन करना था।

आक्रामकता और सहानुभूति जैसे पहलुओं की जांच

शोध में आक्रामक व्यवहार और सहानुभूति के स्तर जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया। इसके साथ ही बचपन के प्रतिकूल अनुभवों और मनोवैज्ञानिक समस्याओं की भूमिका का आकलन किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि यौन अपराधों को समझने के लिए केवल यौन इच्छा के बजाय व्यवहार और सामाजिक-पारिवारिक पृष्ठभूमि जैसे कई पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।

बचपन के अनुभवों पर भी शोध

अध्ययन में बचपन के प्रतिकूल अनुभवों को भी महत्वपूर्ण शोध क्षेत्र के रूप में देखा गया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि शुरुआती जीवन के नकारात्मक अनुभव, आक्रामकता, सहानुभूति और मनोवैज्ञानिक कारकों के बीच क्या संबंध हो सकता है। हालांकि, ऐसे शोध से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी एक अनुभव से भविष्य में यौन अपराध करना तय हो जाता है।

यौन अपराधों की वजह को एक ही कारण तक सीमित करना सही नहीं

AIIMS से जुड़े इस शोध की अहम बात यह है कि यौन अपराधों के कारणों को समझने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की जरूरत है। हर मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और किसी व्यक्ति में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या होना अपने आप में यौन अपराध का प्रमाण या कारण नहीं माना जा सकता।

दिल्ली के एक तृतीयक अस्पताल में दर्ज यौन उत्पीड़न के मामलों के एक अन्य अध्ययन में भी अपराधों से जुड़े सामाजिक और परिस्थितिजन्य पहलुओं का विश्लेषण किया गया था। उस अध्ययन में पाया गया कि बड़ी संख्या में मामलों में आरोपी पीड़ित के परिचित थे।

इसलिए यौन अपराधों की रोकथाम और समझ के लिए मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, पारिवारिक और परिस्थितिजन्य सभी पहलुओं को साथ लेकर अध्ययन करना जरूरी है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *