’15 दिन में इस्तीफा दो’, BCI अध्यक्ष मनन मिश्रा के साथी ने ही मांग लिया उनका रिजाइन
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाय आर सदाशिव रेड्डी ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा पर वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उनसे तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
फंड ट्रांसफर का आरोप
सदाशिव रेड्डी ने पत्र में कहा कि चुप रहना देश के अधिवक्ताओं के भरोसे को तोड़ने जैसा होगा। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि मिश्रा BCI को एक सार्वजनिक संस्था के बजाय अपनी निजी संपत्ति की तरह चला रहे हैं।
रेड्डी के अनुसार, BCI के मूल ट्रस्ट को नजरअंदाज कर सितंबर 2020 में BCI ट्रस्ट पर्ल फर्स्ट (BCI Trust PEARL First) नाम से एक नया ट्रस्ट पंजीकृत किया गया, जिसके ट्रस्टी मिश्रा ने स्वयं चुने।
इसके बाद BCI के फंड से लगभग 150 करोड़ रुपये इस नए ट्रस्ट में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लाया गया, जिस पर अन्य सदस्यों की आपत्तियों को भी खारिज कर दिया गया।
वसूली और परिवारवाद का आरोप
रेड्डी ने आरोप लगाया कि लॉ कॉलेजों को मान्यता और रिन्यूअल देने के बदले BCI द्वारा भारी रकम वसूलने के लिए मजबूर किया गया, जिससे नियामक संस्था की साख को गहरा धक्का लगा है।
उन्होंने कहा कि काउंसिल और उससे जुड़ी शिक्षण संस्थाओं में बिना किसी विज्ञापन या मेरिट लिस्ट के नियुक्तियां की गईं। स्टाफ का एक बड़ा हिस्सा चेयरमैन के करीबी रिश्तेदारों या व्यक्तिगत संपर्कों से भरा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती
यह प्रशासनिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट में भी मनन कुमार मिश्रा के BCI चेयरमैन पद पर बने रहने को लेकर याचिका दायर की जा चुकी है।
अधिवक्ता योगमाया एमजी द्वारा दायर इस याचिका में नियमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि BCI नियमों के अनुसार चेयरमैन का कार्यकाल 2 वर्ष निर्धारित है, जबकि मिश्रा नियमों का उल्लंघन कर एक दशक से अधिक समय से इस पद पर काबिज हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

