मीठे आम के नाम पर कहीं ‘जहर’ तो नहीं खा रहे आप? एक सिंपल टेस्ट से करें केमिकल वाले आम की पहचान

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 यदि आम खाने के शौकीन हैं तो इन्हें घर लाने और सेवन करने से पूर्व आपको सावधान होना चाहिए। जिस तरह से बाजार में दूसरी चीजों में मिलावट देखी जाती है, आम के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। दरअसल, कानूनी रूप से प्रतिबंधित और असुरक्षित होने के बाद भी आमों को पकाने में कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों का प्रयोग किया जाता है।

इस रसायन की मदद से पकाने की प्रक्रिया को देसी भाषा में पुड़िया, मसाला या पाल लगाना भी कहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाली गैस में आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे हानिकारक तत्व भी होते हैं जो सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा जा सकते हैं।

इनसे पेट दर्द, दस्त, गले में जलन, सिरदर्द व एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक इनका सेवन करने पर यह नर्व्स सिस्टम के साथ साथ लिवर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों जैसे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं के लिए रसायनों से पका आम अधिक नुकसानदेह साबित हो सकता है।

रसायनों से कैसे पकाया जाता है आम?

जब कैल्शियम कार्बाइड आम से निकलने वाली नमी के संपर्क में आता है तो यह एसिटिलीन नामक गैस का उत्पादन करता है। यह प्राकृतिक रूप से पकाने वाला हार्मोन एथिलिन की तरह काम करता है। एथिलिन एक प्राकृतिक पादप हार्मोन होता है, जिसका प्रयोग कच्चे फलों और सब्जियों को पकाने इत्यादि के काम में होता है।

यह पौधों के विकास को भी नियंत्रित कर सकता है। बता दें कि एथिलिन का प्रयोग खाद्य पदार्थों को पकाने आदि के लिए बड़े स्तर पर होता है। हालांकि, एथिलिन का प्रयोग कानूनी रूप से मान्य है और सुरक्षित भी माना जाता है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि यह सेहत को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

घर पर कैसे पकाएं आम?

आप पकाने के लिए पारंपरिक और देसी तरीकों का प्रयोग कर सकते हैं। इससे आम का वास्तविक स्वाद बना रहता है, साथ ही यह सेहत के लिए नुकसानदेह भी नहीं है। ग्रामीण इलाकों में अंधेरे कमरे में सूखी घास या पुआल की मोटी परत बिछाकर इसके ऊपर कच्चे आम रख दिए जाते हैं। लकड़ी की पेटियों के अंदर पुराने अखबार बिछाकर भी आम पका सकते हैं। ये अखबार आम की नमी सोख लेते हैं और 3-4 दिनों में आम पककर तैयार हो जाते हैं।

घर पर पकाएं पर न करें गलतियां

  • फ्रिज में आम रखकर पकाना सही नहीं
  • सीधे धूप में रखकर आम पकाना भी गलत है। यह खराब हो सकता है।

कृत्रिम रूप से पकाए जाने वाले आमों की पहचान

  • प्राकृतिक रूप से पके आम पूरी तरह से पीले दिखायी देते हैं। रसायन से पके हुए आम इससे अलग कहीं बहुत हरे तो कहीं बहुत पीले नजर आ सकते हैं।
  • यदि आम अच्छी तरह से पके हुए मालूम पड़ते हैं लेकिन दबाने पर वे कठोर या कड़े लग रहे हों तो वे कृत्रिम रूप से पकाए आम हो सकते हैं।
  • कार्बाइड से पके आम का स्वाद भी अलग होता है। वह फीका होने के साथ रसहीन भी हो सकता है। दरअसल, ऐसे आम भीतर से कच्चे होते हैं।
  • प्राकृतिक रूप से पकाए आम हैं या नहीं, इसकी जांच करने का एक सरल तरीका है। एक बाल्टी में पानी भरकर आम उसमें डालें। यदि वे पूरी तरह डूब जाते है तो समझ लें कि वे प्राकृतिक हैं। वहीं यदि आम पके नहीं हैं या उसे कृत्रिम रूप से बलपूर्वक पकाया जाता है तो ऐसे आम सामान्यतया पानी के ऊपर तैरने लगते हैं।

इन बातों का रहे ध्यान

  • यदि पेटी वाले आम घर लाए हैं तो अच्छी तरह देख लें कि उसमें कोई पुड़िया आदि तो नहीं।
  • प्रयास करें कि आप ऐसी जगहों से आम खरीदें, जो विश्वसनीय हों।
  • ठेलों पर बिकने वाले आम ज्यादातर कृत्रिम रूप से पकाए हो सकते हैं। इन्हें घर लाते समय सतर्कता बरतें।
  • प्रयास करें कि ऐसे आम खरीदें जो पूरी तरह से पके न हों। घर पर पकाने का प्रयास करें ताकि जोखिम की संभावना कम से कम हों।
  • आम का सेवन करने या उसे छीलने से पूर्व पानी में कुछ देर कम से कम से 15-20 मिनट भिगोकर रखें।
  • यह ध्यान रहे कि धोने या छीलने से बाहरी रसायन कम हो सकते हैं पर अभी भी आम पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता।
  • आम के डंठल वाले हिस्से को हटाकर सेवन करें।
  • आम छीलकर उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर प्रयोग कर सकते हैं।
  • यदि आम का स्वाद ठीक नहीं, रसविहीन है तो उनका सेवन करने से बचना चाहिए।

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